अमरीका की एक अदालत ने फ़ेसबुक प्रमुख मार्क ज़करबर्ग पर आइडिया चुराने का आरोप लगाने वाले अमरीकी बंधु को और अधिक हर्जाना दिए जाने की अपील को ख़ारिज कर दिया है. अदालत ने कहा है कि अमरीकी बंधु फ़ेसबुक से किए गए अपने समझौते को नहीं तोड़ सकते.
दो अमरीकी भाई टायलर और कैमरन विंक्लेवौस ने इसी साल जनवरी में छह करोड़ 50 लाख डॉलर के समझौते को चुनौती देते हुए और अधिक हर्जाने की मांग की थी. विंक्लेवौस बंधु ने वर्ष 2008 में फ़ेसबुक से ये समझौता किया था. विंक्लेवौस बंधु का दावा है कि फ़ेसबुक प्रमुख मार्क ज़करबर्ग ने दर असल उनके आइडिया को चुरा लिया था जब उन्होंने वर्ष 2003 में अपने साइट क्नेक्ट-यू को नियमबद्घ करने का काम ज़करबर्ग को दिया था.
विंक्लेवौस बंधु कोई पहले उदाहरण नहीं हैं जो अपने प्रतिद्वंद्वियों से बाज़ार में मात खाने के बाद क़ानूनी रास्तों से वो हासिल करना चाहते हैं जो वो बाज़ार में नहीं कर पाए. किसी ना किसी बिंदु पर क़ानूनी लड़ाई ख़त्म होनी चाहिए और वो समय आ गया है. अदालत ने अपने फ़ैसले में कहा है कि उसे इस केस को दोबारा खोलने की कोई वजह नहीं दिखती. तीन जजों के खंडपीठ ने कहा, ''विंक्लेवौस बंधु कोई पहले उदाहरण नहीं हैं जो अपने प्रतिद्वंदियों से बाज़ार में मात खाने के बाद क़ानूनी रास्तों से वो हासिल करना चाहते हैं जो वो बाज़ार में नहीं कर पाए. किसी ना किसी बिंदु पर क़ानूनी लड़ाई ख़त्म होनी चाहिए और वो समय आ गया है.'' फ़ेसबुक ने भी विंक्लेवौस बंधु के दावों को ख़ारिज कर दिया है.
विंक्लेवौस बंधु का दावा है कि ज़करबर्ग ने उनके सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट के कोड को चुराकर वर्ष 2004 में फ़ेसबुक नाम की वेबसाइट खोल दी. इस झगड़े को ख़त्म करने के लिए फ़ेसबुक ने वर्ष 2008 में एक समझौता कर लिया था लेकिन उन्होंने ये बात नहीं स्वीकार की थी कि ज़करबर्ग ने विंक्लेवौस बंधु की किसी योजना की चोरी की थी. समझौते के तहत विंक्लेवौस बंधु ने दो करोड़ डॉलर नग़द और चार करोड़ 50 लाख डॉलर के शेयर लिए थे. लेकिन विंक्लेवौस बंधु ने इस समझौते को नकारते हुए और अधिक हर्जाने की मांग की थी जिसे अदालत ने ख़ारिज कर दिया.
विंक्लेवौस के वकील जेरोम फ़ॉक ने अदालत के आदेश को अस्वीकारते हुए कहा है कि वो दो सप्ताह के अंदर केस की दोबारा सुनवाई के लिए याचिका दायर करेंगे. ज़करबर्ग का हमेशा से दावा रहा है कि फ़ेसबुक को उन्होंने बनाया है. इस क़ानूनी लड़ाई पर 'द सोशल नेटवर्क' नाम की फ़िल्म भी बनी थी जिसे ऑस्कर सम्मान के लिए नामांकित किया गया था. फ़ेसबुक दुनिया की सबसे बड़ी सोशल नेटवर्किंग साइट है जिसके 50 करोड़ सदस्य हैं और मार्क ज़करबर्ग दुनिया के सबसे कम उम्र के अरबपतियों में से एक हैं

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