
मिथिलामें दहेज के भयानक प्रकोप से लड़नेके लिये मिथिलांचलके युवाओं ने "दहेज मुक्त मिथिला" के नाम से एक मुहिम चलाई है - साथ ही मिथिलांचल की धरोहर सौराठ सभागाछी के पुनरुत्थान के लिए संगठित हुए हैं. मैथिल ब्राह्मणों के विवाह योग्य वरों एवम कन्याओं का परिचय सौराठ में उपलब्ध रहता है - सौराठ में मैथिल ब्राह्मण अपनी बेटियों और बहनों (कुमारियों) के लिये योग्य वरोंका चुनाव करते हैं . बिना कोई लंबा-चौड़ा ताम-झाम-खर्चेका वैवाहिक सम्बन्ध बनानेका महत्त्वपूर्ण परंपरा रहा है जो आज के परिस्थितियोंमें जहाँ मैथिल लोग ग्लोबल हो गये हैं, उन्हें अपने बेटे-बेटियोंके लिये उपयुक्त सम्बन्ध खोजने में परेशानी का सामना करना पड़ता है, एवं व्यर्थ खर्चे करनेके बावजूद सही तलाश पूरी नहीं हो पाता।
ऐसा माना जाता है कि विगत कुछ वर्षोंमें इस परंपराको जान-बूझकर कुछ लोगोंने धूमिल करनेका प्रयास किया है, जिससे मिथिलांचलमें दहेज का प्रकोप आज के आधुनिक समाज में भी कम नहीं हो रहा है। जबकि बेटियोंका शिक्षा-दीक्षा बेटोंसे कतइ कम नहीं और वास्तविक समानता देखनेको मिल रहा है -ऐसे में भी दहेजकी मांग बेटोंके शादीपर करना बेटियोंके ऊपर जुर्म होने जैसा प्रतीत होता है और बेटियोंके जन्म लेने से पहले ही लोग मारनेकी अपनी प्रवृत्ति से बाज नहीं आ रहे हैं जो एक भयानक लैंगिक-असंतुलनकी स्थिति पैदा कर रहा है। हलांकि स्वेच्छा से दहेजकी लेन-देन केवल और केवल वैवाहिक जोड़ेके लिये आशीर्वाद जैसा है, परन्तु आदर्शवादके नाम पर भी ढकोसला. दहेजके हरेक स्वरूपको समाजिक समानता के विरुद्ध ही ज्यादातर देखा जाता है। प्रत्यक्ष - अप्रत्यक्ष दहेजकी लेन-देन से समाजको नुकसान ही उठाना पड़ रहा है।
इस बार "दहेज मुक्त मिथिला" ने अपनी शुरुआती अभियानमें सौराठ के इस पारंपरिक धरोहर से दहेज मुक्त विवाह करनेवालोंका प्रोत्साहन करने के लिये अपनी योजना बनाई है। सौराठसभा जो विभिन्न कारणोंसे लगभग मृतप्राय हो गया है, उसे पुनः जिन्दा करने लिये हम एक जुट होकर इस बार २०-२९ जून, २०११ में सौराठ में विशाल मेलाका आयोजन में सहभागी बनकर वहाँ से दहेज मुक्त विवाह करनेवालोंका सम्मान एवं उनका यशगान गाना चाहते हैं जिसे सारी दुनिया सुने और उनके त्यागसे कुछ सीखे। इस प्रकार एक नये जोशका संचार हो और समाज के हरेक तबके में बिना दहेज लिये शादी करनेका नया की प्रवृति पैदा हो, जिससे दहेज मुक्त मिथिलाका निर्माण होगा और यह संवाद मिथिलांचल सहित देश-विदेश हर जगह पहुँचे - मिथिलांचल दहेज मुक्त होनेके लिये तैयार है.
लोगोंमें दहेज के प्रति कोई लोभ नहीं बल्कि स्वेच्छासे आपसी लेन-देनका कोई विरोध भी नहीं है और वैज्ञानिक महत्त्वका सौराठ सभा जैसा परिकल्पना संसारमें हर जगह हो, जिससे बहन बेटियों के लिये उपयुक्त वर की तलाशने में ही हजारों-लाखोंका खर्चा न आए, समुचित जोड़ी मिले और पारंपरिक महत्त्वका धरोहरको भी बचाया जा सके। आशा है कि इस बार मेलेमें आपलोग भी भव्यताका दर्शन करके हम इस मुहिम को पूरे देश में चला सकें जिससे अरबों लोगोंका भलाई एवं दहेजकी दानवतासे मुक्ति मिले।

---विकाश झा---
दहेज़ मुक्त मिथिला.
1 टिप्पणी:
vikash ji ahank jiwan me safaltak sidhi hardam bhetay ahanke mithila ke dharti hardam yaad rakhat jai mithila jai hind
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