एबटाबाद में ओसामा बिन लादेन पर अमेरिकी हमले के बाद भारत ने दुश्मन की जमीन पर कमांडो स्ट्राइक की रणनीति बनाने की पहल शुरू की है। सरकार ने थल, वायु और नौसेना प्रमुखों के साथ इस पर विचार-विमर्श किया। इसके लिए ब्लू प्रिंट तैयार किए हैं जिनमें कमांडो बलों को बेहतर व कड़े प्रशिक्षण के अलावा जरूरी संसाधन जुटाने का खाका भी है।
भारत का शत्रु ऐसी कोई कार्रवाई न कर सके, इसके लिए भी पूर्वी व दक्षिणी तटों पर प्रभावी राडार कवरेज तेजी से बढ़ाने पर भी खास जोर दिया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी नेवी सील की तर्ज पर दुश्मन की सीमा के भीतर कमांडो ऑपरेशन को अंजाम देने की भारतीय क्षमताओं का मसला शुक्रवार को तीनों सेना के शीर्ष कमांडरों के संयुक्त सम्मेलन में भी उठा। बैठक में पेश किए गए प्रेजेंटेशन में कहा गया कि बेशक वायुसेना के गरुड़, नौसेना के मार्कोज और थलसेना के विशेष बल (स्पेशल फोर्सेज) इस तरह की कारवाई को सफाई से अंजाम देने में सक्षम हैं लेकिन इसके लिए जरूरी संसाधनों की कमी कुछ हद तक आड़े आ सकती है।
सम्मेलन में भारतीय कमांडो बलों की क्षमताएं बढ़ाने के अलावा अपने क्षेत्र में इस तरह की कार्रवाई की संभावनाओं व इन्हें रोकने के उपायों पर भी विचार हुआ। प्रेजेंटेशन में स्वीकार किया गया कि भारत के पूर्वी एवं दक्षिणी तटों पर कुछ क्षेत्रों में राडार कवरेज पर्याप्त न होने से ऐसी कार्रवाई की संभावना हो सकती है।

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