अफ़गा़निस्तान के दौरे पर गए भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अफ़गा़निस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई के तालिबान के साथ सुलह की प्रक्रिया का समर्थन किया है. अफ़गा़निस्तान के तालिबान के साथ बातचीत का समर्थन करके भारत ने अपना पुराना रूख़ बदल लिया है. इससे पहले भारत हमेशा कहता रहा है कि तालिबान के साथ किसी भी तरह की बातचीत नही होनी चाहिए.
मनमोहन सिंह ने काबुल में अफ़गा़निस्तान की संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि युद्ध के भीषण दौर से गुज़र चुके अफ़गा़निस्तान को बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप या दबाव के अपना भविष्य खु़द तय करना है.ये अफ़गा़निस्तान का संप्रभु अधिकार है. युद्ध के भीषण दौर से गुज़र चुके अफ़गा़निस्तान को बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप या दबाव के अपना भविष्य खु़द तय करना है.ये अफ़गा़निस्तान का संप्रभु अधिकार है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों को लिए आतंकवाद और अतिवाद से ख़तरा है और इसे क़तई स्वीकार नहीं किया जा सकता है. उन्होनें कहा,“ ये विचार केवल मौत और तबाही लाते हैं. एक सभ्य समाज में उनकी कोई जगह नहीं है. हम न तो अतिवाद और आतंकवाद की आग को फिर से फैलने की अनुमति दे सकते हैं और न ही किसी सूरत में हमें ऐसा होने देना चाहिए.” मनमोहन सिंह ने अफ़ग़ानिस्तान के पुनर्निर्माण के लिए 50 करोड़ डॉलर के अतिरिक्त सहायता पैकेज की भी घोषणा की.
दोनो देशों ने क्षेत्रीय स्थिरता, आतंकवाद और भारत-अफ़गानिस्तान सामरिक सहयोग के मुद्दों पर सहमति जताई. अफ़गानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान भारत के साथ बढ़ती हुई सुरक्षा चुनौतियों के मद्देनज़र और अधिक सामरिक रिश्ते बनाना चाहता है

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