सीबीआई ने दवा घोटाला मामले में सेवानिवृत्त स्वास्थ्य सचिव सियाराम प्रसाद सिन्हा को शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया। उन्हें विशेष न्यायाधीश की अदालत में पेश किया गया, जहां से 14 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। जांच एजेंसी ने पूर्व स्वास्थ्य मंत्री भानू प्रताप शाही व निलंबित आईएएस अफसर डॉ. प्रदीप कुमार के कई ठिकानों पर भी छापेमारी की, मगर उन दोनों का कोई सुराग नहीं मिला।
हाईकोर्ट ने सीबीआई को फटकार लगाते हुए पूछा था कि आखिर आरोपियों की गिरफ्तारी क्यों नहीं हो रही। इसी बीच शुक्रवार को सीबीआई ने हाईकोर्ट को सिन्हा की गिरफ्तारी की सूचना दी और बताया कि अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।
31 अगस्त 2009 को डॉ.प्रदीप कुमार सहित सात लागों के रांची, दिल्ली, डालटनगंज व हजारीबाग सहित 16 ठिकानों पर सीबीआई ने छापे मारे। डॉ. प्रदीप के घर से 47 लाख रुपए का फिक्स डिपॉजिट, फ्लैट व जमीन के कागजात और बिल्डर धर्मेंद्र के ऑफिस से 36 लाख नकद व एक करोड़ से ज्यादा के निवेश के कागजात मिले।
जांच के क्रम में सीबीआई ने 500 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की।
दिसंबर 2010 में सीबीआई निदेशक ने चार्जशीट दायर करने पर सहमति जताई। अभियोजन स्वीकृति के लिए राज्य सरकार को पत्र भेजा। राज्य ने स्वीकृति दे दी, मगर केंद्र से अब तक स्वीकृति नहीं मिली। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत तत्कालीन स्वास्थ्य सचिव डॉ. प्रदीप कुमार ने नियमों को दरकिनार कर 130 करोड़ रुपए के दवा व उपकरण खरीदे थे। जांच में पता चला कि तत्कालीन मंत्री भानू प्रताप शाही, स्टेट आरसीएच अफसर विजय शंकर नारायण सिंह, स्टेट ड्रग कंट्रोलर मदन मोहन प्रसाद, स्टेट फाइनांस मैनेजर प्रद्यूत मुखर्जी सहित 19 सप्लायर इस घोटाले में शामिल थे। स्वास्थ्य सचिव सियाराम प्रसाद सिन्हा के कार्यकाल में भी दवा खरीद में गड़बड़ी हुई थी। बिना यह पता लगाए कि किस जिले में कितनी दवा व उपकरणों की जरूरत है, अफसरों ने ऊंचे मूल्य पर बेहिसाब खरीदारी कर ली। इनमें से लाखों की दवाएं आरसीएच के सेंट्रल वेयर हाउस में डंप कर दी गई। सीबीआई जांच में इसका खुलासा हुआ था।
हाईकोर्ट ने सीबीआई को फटकार लगाते हुए पूछा था कि आखिर आरोपियों की गिरफ्तारी क्यों नहीं हो रही। इसी बीच शुक्रवार को सीबीआई ने हाईकोर्ट को सिन्हा की गिरफ्तारी की सूचना दी और बताया कि अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।
31 अगस्त 2009 को डॉ.प्रदीप कुमार सहित सात लागों के रांची, दिल्ली, डालटनगंज व हजारीबाग सहित 16 ठिकानों पर सीबीआई ने छापे मारे। डॉ. प्रदीप के घर से 47 लाख रुपए का फिक्स डिपॉजिट, फ्लैट व जमीन के कागजात और बिल्डर धर्मेंद्र के ऑफिस से 36 लाख नकद व एक करोड़ से ज्यादा के निवेश के कागजात मिले।
जांच के क्रम में सीबीआई ने 500 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की।
दिसंबर 2010 में सीबीआई निदेशक ने चार्जशीट दायर करने पर सहमति जताई। अभियोजन स्वीकृति के लिए राज्य सरकार को पत्र भेजा। राज्य ने स्वीकृति दे दी, मगर केंद्र से अब तक स्वीकृति नहीं मिली। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत तत्कालीन स्वास्थ्य सचिव डॉ. प्रदीप कुमार ने नियमों को दरकिनार कर 130 करोड़ रुपए के दवा व उपकरण खरीदे थे। जांच में पता चला कि तत्कालीन मंत्री भानू प्रताप शाही, स्टेट आरसीएच अफसर विजय शंकर नारायण सिंह, स्टेट ड्रग कंट्रोलर मदन मोहन प्रसाद, स्टेट फाइनांस मैनेजर प्रद्यूत मुखर्जी सहित 19 सप्लायर इस घोटाले में शामिल थे। स्वास्थ्य सचिव सियाराम प्रसाद सिन्हा के कार्यकाल में भी दवा खरीद में गड़बड़ी हुई थी। बिना यह पता लगाए कि किस जिले में कितनी दवा व उपकरणों की जरूरत है, अफसरों ने ऊंचे मूल्य पर बेहिसाब खरीदारी कर ली। इनमें से लाखों की दवाएं आरसीएच के सेंट्रल वेयर हाउस में डंप कर दी गई। सीबीआई जांच में इसका खुलासा हुआ था।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें