पाकिस्तानी सेना के अफसरों को अमेरिका के खिलाफ प्रशिक्षित किया जा रहा है। अमेरिका के खिलाफ यह भड़काऊ ट्रेनिंग पाकिस्तान के सैन्य संस्थानों में दी जा रही है। खोजी वेबसाइट विकीलीक्स ने यह खुलासा किया है। इस खुलासे के मुताबिक पाकिस्तानी सेना के भीतर अमेरिका से नफरत की भावना बढ़ती जा रही है।
पिछले कुछ महीनों से दोनों देशों के रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं। 2 मई को ऐबटाबाद में एक कमांडो ऑपरेशन के दौरान अमेरिका ने लादेन को मार गिराया था। इस घटना को लेकर पाकिस्तान में लोगों में काफी गुस्सा है। ज़्यादातर पाकिस्तानियों का मानना है कि अमेरिका की यह गुप्त कार्रवाई उनकी सार्वभौमिकता में दखल है। अमेरिका का यह डर अब और बढ़ गया है कि लादेन की मौत के बाद पाकिस्तानी सेना इस्लामी चरमपंथियों को बढ़ावा दे रही है।
विकीलीक्स पर आए अमेरिकी राजनयिक दस्तावेज में पाकिस्तान में अमेरिका की पूर्व राजदूत एन पैटरसन ने पाकिस्तान के नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी (एनडीयू) के अफसरों के बारे में टिप्पणी करते हुए उन्हें अमेरिका के प्रति पूर्वाग्रह से भरा हुआ बताया। पाकिस्तान के अखबार डॉन में प्रकाशित विकीलीक्स के खुलासे में पैटरसन के हवाले से कहा गया है कि एनडीयू में ट्रेनिंग ले रहे पाकिस्तान के नए कर्नल और ब्रिगेडियर पूर्वाग्रह से भरी हुई ट्रेनिंग ले रहे हैं, जहां वे अमेरिका के बारे में कोई और राय सुनने को तैयार नहीं हैं। ऐसा माना जा रहा है कि पाकिस्तान की ज़्यादातर अवाम के मन में अमेरिका विरोधी भावना घर कर चुकी है, लेकिन लादेन की हत्या के बाद यह भावना और ज़्यादा मजबूत हुई है। पैटरसन ने खुफिया राजनयिक दस्तावेज में लिखा, 'अमेरिका को कोशिश करनी चाहिए कि वह पाकिस्तान के उन सैन्य अफसरों पर ध्यान दे जिन्हें 90 के दौर में पाकिस्तान पर लगे प्रतिबंधों के बाद अमेरिका में ट्रेनिंग नहीं मिली है।' गौरतलब है कि 90 के दशक में पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम के मद्देनजर अमेरिका ने उस पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे।
विकीलीक्स द्वारा जारी दस्तावेज में अमेरिका के एक सैन्य अधिकारी कर्नल माइकल स्लीशर की भी रिपोर्ट का जिक्र है। स्लीशर ने एनडीयू में ट्रेनिंग की थी। स्लीशर ने अपनी रिपोर्ट में पैटरसन की राय से इत्तफाक रखा। अपनी रिपोर्ट में स्लीशर ने लिखा, 'पाकिस्तानी सेना के वरिष्ठ अधिकारियों को अमेरिका की रीति-नीति को लेकर गलतफहमी है। वे इसी शक और शुबह के साथ नए अफसरों को ट्रेनिंग देते हैं। जबकि कई वरिष्ठ अफसरों के बेटे-बेटियां अमेरिका और ब्रिटेन के मशहूर विश्वविद्यालयों में पढ़े हुए हैं। नए अफसर अपने वरिष्ठ अधिकारियों की राय से इत्तफाक रखने लगते हैं।'
एनडीयू में अध्यापक हुमायूं खान ने इस बात से इनकार किया है कि विश्वविद्यालय में अमेरिका विरोधी ट्रेनिंग दी जाती है। उन्होंने कहा, 'मैंने आज तक कोई पूर्वाग्रह नहीं देखा है।' डॉन अखबार के मुताबिक दुनिया के कई देशों में मौजूद अमेरिकी दूतावासों के गुप्त राजनयिक दस्तावेजों से साफ है कि अमेरिका पाकिस्तान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों पर कड़ी नज़र रखे हुए है। 'आतंक के खिलाफ जंग' में पाकिस्तान अमेरिका का सहयोगी है। अफगानिस्तान में और पाकिस्तान के कबाइली इलाकों में अल कायदा और तालिबान के खिलाफ जंग लड़ रहा अमेरिका पाकिस्तान को उसके सहयोग के बदले करोड़ों डॉलर की रकम देता है। वहीं, पाकिस्तान में सामाजिक और आर्थिक रूप से बेहद खराब हालात हैं। हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच अमेरिकी नागरिक रेमंड डेविस, खुफिया एजेंसियों की भूमिका को लेकर जबर्दस्त मतभेद रहे हैं।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें