भारत और अफ्रीका ने सीमापार के आतंकवाद और समुद्री लूटपाट की कड़ी आलोचना की है और इससे एकजुट होकर लड़ने का संकल्प दोहराया है.
दोनों देशों ने बुधवार को कहा कि राष्ट्रों को अपनी सरजमीं का इस्तेमाल करने की इजाजत आतंकवादियों को नहीं देना चाहिये. दोनों देशों ने समुद्री लूट के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की मांग की है.
दोनों ही पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में तत्काल सुधार की आवश्यकता पर जोर देते हुये एक दूसरे की सदस्यता के दावे का समर्थन किया. अफ्रीका-भारत मंच के दूसरे शिखर सम्मेलन के यहां सम्पन्न होने के दौरान अदीस अबाबा घोषणापत्र को बुधवार को स्वीकार किया गया. इसके जरिए सभी देशों से यह सुनिश्चित करने की अपील की गई कि सीमा पार से होने वाली आतंकवादी गतिविधियां न हों और उनकी सरजमीं आतंकवादियों का ठिकाना न बने.
इस शिखर सम्मेलन की सह अध्यक्षता प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और गुयाना गणराज्य के राष्ट्रपति ओबिआंग नगुएमा मबासोजो ने की. घोषणापत्र में कहा गया कि हम स्पष्ट रूप से आतंकवाद के सभी स्वरूपों की निंदा करते हैं. किसी भी स्थान पर आतंकवादी गतिविधि समूचे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए खतरा है. हम वैश्विक आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और अधिक मजबूत करने की जरूरत को स्वीकार करते हैं.
घोषणा पत्र के जरिए अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद से जुड़े सभी समझौते, इससे जुड़े प्रोटोकॉल तथा आतंकवाद निरोध पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव का अनुपालन करने की बात स्वीकार की गई. इसमें सभी देशों से अपील की गई है कि वे अंतराष्ट्रीय आतंकवाद के मामले में अभियोजन, प्रत्यर्पण और कानूनी सहायता मुहैया कराने में एक दूसरे का सहयोग करें. नेताओं ने आतंकवादी हमलों से होने वाले नुकसान पर अफसोस जताया और इस तरह के अपराध को अंजाम देने वाले लोगों एवं उनके सहयोगियों को शीघता से अभियोगी ठहराने की मांग की. उन्होंने अपील की कि इन लोगों को यथाशीघ्र न्याय के दायरे में लाया जाए. समुद्री लूट की समस्या पर गंभीर चिंता जताते हुए नेताओं ने समुद्री जहाज पर सवार लोगों का अपहरण कर उन्हें बंधक बनाए जाने, उनसे फिरौती वसूल करने और राजनीतिक छूट मांगे जाने की घटना की निंदा की. घोषणापत्र में कहा गया है कि इस तरह की घटनाओं में बढ़ोतरी पर हम गंभीर चिंता जताते हैं.
भारत ने सोमालियाई समुद्री लुटेरों द्वारा पैदा किए गए खतरों पर अपनी गंभीर चिंता जाहिर की. अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी कंपनियों द्वारा समुद्र में भेजे जाने वाले करीब 11 फीसदी नाविक भारतीय नागरिक हैं, जिनमें से कुछ को बंधक बना लिया गया है. जहाजों पर हमले की 200 से अधिक घटनाएं हुई हैं. इनमें अपहरण की 70 सफल घटनाएं भी शामिल हैं. यह माना जा रहा है कि बंधकों और जहाजों को छोड़ने के लिए 5 करोड़ डॉलर से अधिक फिरौती ली गई. दोनों पक्ष ने संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधार की फौरन और अपरिहार्य जरूरत की बात का जिक्र किया ताकि यह समकालीन वास्तविकताएं प्रदर्शित कर सके.
भारत ने सुरक्षा परिषद में अफ्रीका की स्थायी सदस्यता के दावे का समर्थन किया. अफ्रीका ने भी भारत की स्थायी सदस्यता के दावे का अपनी ओर से समर्थन किया. घोषणापत्र में भी लीबियाई संकट का जिक्र किया गया है. इसमें कहा गया है कि हमने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के लीबिया से संबंधित प्रस्ताव 1970, 1973 पर ध्यान दिया है. हमारा जोर है कि उन्हें प्रस्ताव की मूल भावना के अनुरूप लागू किया जाए. इसके अनुसार कि इस संबंध में हम लीबिया में सभी प्रकार के संघर्ष को तत्काल समाप्त किए जाने का आह्वान करते हैं तथा संघर्ष में शामिल सभी पक्षों से शांतिपूर्ण एवं बातचीत के जरिए राजनीतिक समाधान का अनुरोध करते हैं.

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