मैं हूँ राजभवन का कैदी :-भारद्वाज - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

शुक्रवार, 27 मई 2011

मैं हूँ राजभवन का कैदी :-भारद्वाज


 कर्नाटक में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश वाली अपनी रिपोर्ट केंद्र द्वारा खारिज कर देने से जाहिरा तौर पर निराश राज्यपाल हंसराज भारद्वाज ने गुरुवार को खुद को राजभवन का कैदी करार दिया। 

भारद्वाज ने राजभवन में हुए एक कार्यक्रम में कहा कि मेरे सहित हर कोई कैदी है। मैं राजभवन का कैदी हूं। हालांकि, अशांत समय में साहित्य मेरी मदद करता है। राज्यपाल उनके और राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा के बीच हुए हालिया राजनीतिक विवाद का जाहिरा तौर पर संदर्भ दे रहे थे। यह विवाद बीएस येदियुरप्पा सरकार को बर्खास्त करने की उनकी सिफारिश के चलते उत्पन्न हुआ था। केंद्र यह सिफारिश खारिज कर चुका है।
   
कन्नड़ के जाने-माने कवि केवी पुटटप्पा की कृतियों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि मैं दार्शनिक नहीं हूं और न ही नेता हूं। जब कभी मैं इन क्षेत्रों का रुख करता हूं, मैं गलतियां कर बैठता हूं। मुझे अक्सर नेता माना जाता है लेकिन असल में मैं वकील हूं और मैं एक सख्त वकील हूं। कवि की कृतियों से प्रेरित होकर ही भारद्वाज ने खुद को स्वयं का कैदी करार दिया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा राज्य के 16 विधायकों को अयोग्य करार देने के फैसले के बाद भारद्वाज ने 15 मई को कर्नाटक में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश करती रिपोर्ट केंद्र को भेजी थी। इसके बाद भाजपा ने उनकी कड़ी आलोचना की थी। केंद्र ने इससे पहले पिछले वर्ष अक्टूबर में भी उनकी रिपोर्ट खारिज कर दी थी।

कोई टिप्पणी नहीं: