बिहार के रोहतास जिले के लोगों ने रोहतासगढ़ किले तक जाने के लिए खुद ही पहाड़ काटकर 10 किलोमीटर लम्बी सड़क का निर्माण किया है। इस सड़क के बन जाने से रोहतास किला जाने वालों की संख्या में वृद्धि हो गई है। यहां के ग्रामीणों ने सड़क निर्माण कर लोगों के सामने एक मिसाल पेश की है।
कभी डकैतों और फिर नक्सलियों का आरामगाह माने जाने वाले कैमूर पहाड़ी पर स्थित रोहतास किले तक जाने के लिए कोई सड़क न होने से लोगों का यहां आवागमन करीब-करीब बंद ही हो गया था।
ग्रामीणों का कहना है कि पहले रोहतास प्रखंड मुख्यालय से रोहतास किले की दूरी करीब 50 किलोमीटर थी और वहां तक पहुंचने के लिए ऊबड़-खाबड़ रास्तों से होकर जाना पड़ता था। ग्रामीणों ने इसके लिए पहल की और वे लोगों के सामने मिसाल बन गए। बभनतालाब, नागाटोली, रोहतासगढ़ सहित कई गांवों के लोगों ने पहाड़ काटकर सड़क निर्माण का निर्णय लिया। बभनतालाब गांव के ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा कर पहले टोकरी, फावड़ा आदि सामान खरीदे और फिर श्रमदान कर तीन महीने में 10 किलोमीटर लम्बी सड़क बना दी। उनका कहना है कि जिले के पूर्व पुलिस अधीक्षक ने भी इसके लिए काफी योगदान दिया। 45 युवकों को रोहतास किले का गाइड बना दिया तथा उन्हें साइकिल और टॉर्च उपलब्ध करा दिए गए। इस सड़क के बन जाने से अब किले की दूरी मात्र 20 किलोमीटर रह गई और अब वहां मोटरगाड़ी तक आराम से पहुंच जाती है।
कुछ दिनों पहले तक जहां एक भी पर्यटक इस किले को देखने नहीं आता था, वहीं इस वर्ष अब तक 500 से ज्यादा पर्यटक इस किले का दीदार कर चुके हैं। इस किले का निर्माण राजा हरिश्चंद्र के पुत्र रोहितेश्वर ने करवाया था। ग्रामीणों का मानना है कि आज भी इस किले के कई रहस्य हैं जो लोगों के सामने नहीं आए हैं। अधिकारी भी मानते हैं कि सड़क बन जाने से जहां पर्यटक इस किले तक पहुंचने लगे हैं, वहीं यहां असामाजिक तत्वों का जमघट लगना भी कम हुआ। इसके बाद पर्यटकों के आने से जहां स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा वहीं नक्सलवाद पर भी लगाम कसने में प्रशासन को मदद मिलेगी।
बभनतालाब के किसान एवं पूर्व वार्ड सदस्य का कहना है कि इसमें कोई दो मत नहीं हैं कि ग्रामीणों द्वारा सड़क बनाने में उन्हें काफी कष्ट झेलना पड़ा लेकिन अब सही मायने में यहां के लोग विकास से जुड़ रहे हैं। वह कहते हैं कि पूर्व में यहां की खेती पूरी तरह प्राचीन पद्धति से होती थी, अब यहां के लोग ट्रैक्टर की मदद से खेती करने लगे हैं। पहले पहाड़ी पर गांव होने के कारण ट्रैक्टर यहां तक नहीं पहुंच पाता था।
किले के दूसरी ओर उत्तर प्रदेश राज्य का सोनभद्र जिला क्षेत्र है।
कभी डकैतों और फिर नक्सलियों का आरामगाह माने जाने वाले कैमूर पहाड़ी पर स्थित रोहतास किले तक जाने के लिए कोई सड़क न होने से लोगों का यहां आवागमन करीब-करीब बंद ही हो गया था।
ग्रामीणों का कहना है कि पहले रोहतास प्रखंड मुख्यालय से रोहतास किले की दूरी करीब 50 किलोमीटर थी और वहां तक पहुंचने के लिए ऊबड़-खाबड़ रास्तों से होकर जाना पड़ता था। ग्रामीणों ने इसके लिए पहल की और वे लोगों के सामने मिसाल बन गए। बभनतालाब, नागाटोली, रोहतासगढ़ सहित कई गांवों के लोगों ने पहाड़ काटकर सड़क निर्माण का निर्णय लिया। बभनतालाब गांव के ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा कर पहले टोकरी, फावड़ा आदि सामान खरीदे और फिर श्रमदान कर तीन महीने में 10 किलोमीटर लम्बी सड़क बना दी। उनका कहना है कि जिले के पूर्व पुलिस अधीक्षक ने भी इसके लिए काफी योगदान दिया। 45 युवकों को रोहतास किले का गाइड बना दिया तथा उन्हें साइकिल और टॉर्च उपलब्ध करा दिए गए। इस सड़क के बन जाने से अब किले की दूरी मात्र 20 किलोमीटर रह गई और अब वहां मोटरगाड़ी तक आराम से पहुंच जाती है।
कुछ दिनों पहले तक जहां एक भी पर्यटक इस किले को देखने नहीं आता था, वहीं इस वर्ष अब तक 500 से ज्यादा पर्यटक इस किले का दीदार कर चुके हैं। इस किले का निर्माण राजा हरिश्चंद्र के पुत्र रोहितेश्वर ने करवाया था। ग्रामीणों का मानना है कि आज भी इस किले के कई रहस्य हैं जो लोगों के सामने नहीं आए हैं। अधिकारी भी मानते हैं कि सड़क बन जाने से जहां पर्यटक इस किले तक पहुंचने लगे हैं, वहीं यहां असामाजिक तत्वों का जमघट लगना भी कम हुआ। इसके बाद पर्यटकों के आने से जहां स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा वहीं नक्सलवाद पर भी लगाम कसने में प्रशासन को मदद मिलेगी।
बभनतालाब के किसान एवं पूर्व वार्ड सदस्य का कहना है कि इसमें कोई दो मत नहीं हैं कि ग्रामीणों द्वारा सड़क बनाने में उन्हें काफी कष्ट झेलना पड़ा लेकिन अब सही मायने में यहां के लोग विकास से जुड़ रहे हैं। वह कहते हैं कि पूर्व में यहां की खेती पूरी तरह प्राचीन पद्धति से होती थी, अब यहां के लोग ट्रैक्टर की मदद से खेती करने लगे हैं। पहले पहाड़ी पर गांव होने के कारण ट्रैक्टर यहां तक नहीं पहुंच पाता था।
किले के दूसरी ओर उत्तर प्रदेश राज्य का सोनभद्र जिला क्षेत्र है।

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