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रविवार, 19 जून 2011

लोकपाल बिल समिति निर्णायक दौर में.

लोकपाल बिल पर बनी संयुक्त मसौदा समिति की बैठकेंनिर्णायक दौर में पहुंच गई है। सरकार और कांग्रेस नेअपनी साख बचाने के लिए जहां अन्य राजनीतिक दलोंको भी प्रक्रिया में शामिल करने की रणनीति बनाई है।वहीं अन्ना हजारे के नेतृत्व वाली सिविल सोसायटी ने भीअपनी मांगें मनवाने के लिए सरकार पर दबाव बढ़ा दियाहै। हालांकि सिविल सोसायटी सदस्य संतोष हेगड़े 20 और 21 जून को होने वाली बैठक में शामिल नहीं रहेंगे।उन्होंने 16 अगस्त से प्रस्तावित अन्ना हजारे के अनशनसे भी दूरी बना ली है।

समिति की 20 और 21 जून को बैठक होने वाली है। 30 जून तक उसकी रिपोर्ट कैबिनेट के सामने रखी जानी है।केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने स्पष्ट किया है कि जिन मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाएगी, उन्हें दोनों पक्षों की राय केसाथ सभी मुख्यमंत्रियों और राजनीतिक दलों के समक्ष रखा जाएगा। इसके बाद ही मसला कैबिनेट में जाएगा।

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा है कि सरकार प्रथमदृष्ट्या प्रधानमंत्री को लोकपाल केदायरे में लाने के विरोध में हैं। हालांकि पद छोड़ने के बाद उन्हें इसके दायरे में लाया जा सकता है। उन्होंने कहा किइस बारे में कोई भी फैसला सरकार की ओर से तब किया जाएगा, जब लोकपाल विधेयक का मसौदा कैबिनेट केसमक्ष आएगा। सिब्बल ने कहा कि अगर टीम अन्ना की ओर से अकाट्य दलील आती है तो समिति में शामिलपांचों मंत्री प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाने की बात मानने को इच्छुक होंगे। सिब्बल ने कहा कि दुनिया मेंकिस प्रधानमंत्री के खिलाफ पद पर बने रहते समय मुकदमा चलाया गया है?

सिब्बल ने कहा कि अन्ना हजारे के साथ लोग इसलिए खड़े हुए क्योंकि वे भ्रष्टाचार से तंग चुके हैं। लेकिन इनमेंसे ज्यादातर नहीं जानते कि लोकपाल विधेयक क्या है। हैमलिन के पाइड पाइपरकी तरह हैं। लोग भ्रष्टाचार सेतंग हैं और सरकार भी है। हम इससे निपटना चाहते हैं। लेकिन जो लोग उनका (हजारे) अनुसरण करते हैं औरकहते हैं कि भ्रष्टाचार से निपटना चाहिए। वे यह भी नहीं जानते कि लोकपाल विधेयक क्या है।
सिब्बल ने कहा कि ड्राफ्ट बिल को कैबिनेट में रखने से पहले सरकार सभी मुख्यमंत्रियों और राजनीतिक पार्टियोंकी राय लेगी। उनके सामने भी मुद्दों पर सहमति और असहमति जाहिर की जाएगी। कैबिनेट के बाद विधेयक कोसंसद में पेश किया जाएगा, जहां से इसे स्थाई समिति को भेजा जा सकता है।

अन्ना हजारे के नेतृत्व में समाज के सदस्यों और सरकार में गहराते मतभेद के बीच शनिवार को प्रधानमंत्रीमनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की पार्टी के अन्य शीर्ष नेताओं के साथ बैठक हुई। इसमेंसर्वदलीय बैठक बुलाने पर आम राय बनती दिखी। लोकपाल और तेलंगाना जैसे अन्य संवेदनशील मुद्दों को लेकरसोनिया के नेतृत्व वाले कांग्रेस कोर ग्रुप की बैठक हुई। इससे पहले शुक्रवार रात में में भी कोर ग्रुप में दो घंटे तकचर्चा हुई थी।

गांधीवादी अन्ना हजारे का कहना है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से बहुतउम्मीदें थीं। वे दोनों आशा की किरण थे। लेकिन बीच में क्या गड़बड़ हुई, पता नहीं। सरकार पलट गई। सिंह के बारेमें उन्होंने कहा, "मैं इस बात से सहमत हूं कि वे ईमानदार प्रधानमंत्री हैं। लेकिन वे क्या कर सकते हैं। वे रिमोटकंट्रोल से नियंत्रित हैं।

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