पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख ने आखिरकार मान लिया कि उन्होंने नियमों में ढील देकर सेना के दो आला अफसरों को आदर्श सोसायटी की सदस्यता दी। ये दो अफसर हैं, पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल दीपक कपूर और जनरल एन.सी.विज। देशमुख के हलफनामे से साफ हो गया है कि नेताओं से साठ-गांठ कर सेना के अफसरों ने आदर्श सोसायटी में फ्लैट हासिल किए, जिसे अब सेना ही सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक बता रही है।
जनरल दीपक कपूर और जनरल एन.सी.विज की राष्ट्रसेवा से महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने नियमों को तोड़कर दोनों को आदर्श सोसायटी की सदस्यता दे दी। खुद विलासराव देशमुख ने शुक्रवार को जांच आयोग के सामने हलफनामा पेश करके ये बात मानी है। देशमुख ने लिखा है-मैंने मेंबरशिप के लिए आवश्यक डोमिसाइल सर्टिफिकेट के नियम को शिथिल किया। जनरल दीपक कपूर और जनरल विज के केस में मैंने ऐसा किया।
देशमुख के मुताबिक कपूर और विज की सामाजिक हैसियत और राष्ट्र की सेवा में बिताए गए उनके जीवन को देखते हुए, ये फैसला मेरे ख्याल से बिल्कुल सही था। दोनों सेना के वरिष्ठतम अधिकारी थे, जब उन्होंने आवेदन दिया था तो सेना के अधिकारियों के लिए डोमिसाइल सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं थी, ये प्रावधान 2007 में लागू किया गया। उनकी सेवा और रिटायर्ड आर्मी चीफ होने के नाते मैंने स्पेशल केस के तौर पर सदस्यता मंजूर की थी। साथ ही ये भी लिखा था कि इसे भविष्य में नजीर ना माना जाए।

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