गांधीवादी कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने गुरुवार को आरोपलगाया कि लोकपाल मामले में संप्रग सरकार लोगों के साथछल कर रही है। उन्होंने लोकपाल विधेयक मसौदा के दोप्रारूप कैबिनेट को विचार के लिये भेजे जाने के औचित्य परभी सवाल उठाया।
सरकार पर वायदा खिलाफी का आरोप लगाते हुए हजारे नेचेतावनी दी कि अगर सरकार ने कमजोर भ्रष्टाचार विरोधीकानून को स्वीकृति दी तो वह जंतर-मंतर पर फिर से विरोधप्रदर्शन शुरू करेंगे।
लोकपाल विधेयक पर संयुक्त मसौदा समिति के गतिरोधवाली बैठक के दूसरे दिन उन्होंने कहा कि यदि आप दो मसौदेचाहते हैं तो फिर संयुक्त समिति गठित करने की क्या आवश्यकता थी। हजारे ने आरोप लगाया कि सरकार हमारासमय खराब कर रही है। हमने अपना मसौदा बहुत पहले तैयार कर लिया था और उनका भी तैयार था। ऐसे मेंउन्होंने उसे कैबिनेट के समक्ष पहले पेश क्यों नहीं किया। सरकार छल कर रही है।
सरकार और समाज के सदस्य बुधवार को छठी बैठक में भी आम राय पर पहुंचने में असफल रहने पर फैसला हुआकि कैबिनेट के समक्ष विचार के लिए दो विधेयक के मसौदे के दो प्रारूप भेजे जाएं।
सरकार ने जहां मतभेद के मुद्दों पर टिप्पणी के साथ विधेयक के एक ही मसौदे को भेजने की बात कही थी, वहींसमाज के सदस्यों ने इस बात पर जोर दिया कि मंत्रिमंडल को विधेयक के दो मसौदों पर विचार करना चाहिए।
हजारे ने आरोप लगाया कि सरकार के पास मजबूत लोकपाल विधेयक को लागू करने की इच्छाशक्ति नहीं हैजिसमें भ्रष्ट लोगों को जेल भेजने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि कमजोर विधेयक को स्वीकार करने का क्यामतलब है, यदि एक कमजोर विधेयक पास हुआ तब हमें इसका विरोध करना होगा। यदि यह एक कमजोरविधेयक होगा तो जनता को इससे कोई लाभ नहीं होगा।
हजारे ने आरोप लगाया कि सरकार समय बर्बाद कर रही है। गांधीवादी कार्यकर्ता ने कहा कि लोकपाल विधेयकलाना सरकार की मंशा नहीं है। हमें इससे कोई व्यक्तिगत लाभ नहीं मिल रहा है। जो भारत को भ्रष्टाचार से छुटकारानहीं दिला सकता ऐसे मसौदे क्या तुक है। हजारे ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कठोर कानून देश के गरीबों कीमदद करेगा।
सरकार पर वायदा खिलाफी का आरोप लगाते हुए हजारे नेचेतावनी दी कि अगर सरकार ने कमजोर भ्रष्टाचार विरोधीकानून को स्वीकृति दी तो वह जंतर-मंतर पर फिर से विरोधप्रदर्शन शुरू करेंगे।
लोकपाल विधेयक पर संयुक्त मसौदा समिति के गतिरोधवाली बैठक के दूसरे दिन उन्होंने कहा कि यदि आप दो मसौदेचाहते हैं तो फिर संयुक्त समिति गठित करने की क्या आवश्यकता थी। हजारे ने आरोप लगाया कि सरकार हमारासमय खराब कर रही है। हमने अपना मसौदा बहुत पहले तैयार कर लिया था और उनका भी तैयार था। ऐसे मेंउन्होंने उसे कैबिनेट के समक्ष पहले पेश क्यों नहीं किया। सरकार छल कर रही है।
सरकार और समाज के सदस्य बुधवार को छठी बैठक में भी आम राय पर पहुंचने में असफल रहने पर फैसला हुआकि कैबिनेट के समक्ष विचार के लिए दो विधेयक के मसौदे के दो प्रारूप भेजे जाएं।
सरकार ने जहां मतभेद के मुद्दों पर टिप्पणी के साथ विधेयक के एक ही मसौदे को भेजने की बात कही थी, वहींसमाज के सदस्यों ने इस बात पर जोर दिया कि मंत्रिमंडल को विधेयक के दो मसौदों पर विचार करना चाहिए।
हजारे ने आरोप लगाया कि सरकार के पास मजबूत लोकपाल विधेयक को लागू करने की इच्छाशक्ति नहीं हैजिसमें भ्रष्ट लोगों को जेल भेजने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि कमजोर विधेयक को स्वीकार करने का क्यामतलब है, यदि एक कमजोर विधेयक पास हुआ तब हमें इसका विरोध करना होगा। यदि यह एक कमजोरविधेयक होगा तो जनता को इससे कोई लाभ नहीं होगा।
हजारे ने आरोप लगाया कि सरकार समय बर्बाद कर रही है। गांधीवादी कार्यकर्ता ने कहा कि लोकपाल विधेयकलाना सरकार की मंशा नहीं है। हमें इससे कोई व्यक्तिगत लाभ नहीं मिल रहा है। जो भारत को भ्रष्टाचार से छुटकारानहीं दिला सकता ऐसे मसौदे क्या तुक है। हजारे ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कठोर कानून देश के गरीबों कीमदद करेगा।

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