भ्रष्टाचार के खिलाफ अनशन पर बैठे योग गुरू बाबारामदेव और उनके हजारों समर्थकों को यहां के रामलीलामैदान से 'खदेड़ने' के लिए की गई कार्रवाई को दिल्लीपुलिस ने उचित ठहराया है। पुलिस ने इस बात से इनकारकिया है कि बीते 4 जून की रात बाबा रामदेव कोरामलीला मैदान से हटाने के लिए की गई कार्रवाईअनुचित थी। दिल्ली पुलिस ने उल्टे बाबा रामदेव औरउनके समर्थकों पर अफरातफरी का माहौल पैदा करने का दोष मढ़ा है।
दिल्ली पुलिस ने रामलीला मैदान से रामदेव और उनके समर्थकों को ताकत के बल पर खदेड़े जाने का जवाब आजसुप्रीम कोर्ट में पेश कर दिया। वैसे, कोर्ट ने इसके लिए 20 जून तक का समय दिया था। पुलिस ने अपनी रिपोर्ट मेंबाबा रामदेव के खिलाफ की गई कार्रवाई और रामलीला मैदान से जबरन हटाए जाने का बचाव किया है। पुलिस नेकहा है कि रामलीला मैदान में योग शिविर की इजाजत थी लेकिन इसका इस्तेमाल अन्य मकसद से किया जा रहाथा। पुलिस के मुताबिक बाबा रामदेव के खिलाफ किसी तरह का बल प्रयोग या लाठी चार्ज नहीं किया गया था।लेकिन मीडिया में आई तस्वीरों से साफ है कि पुलिस ने रामदेव के शिविर में उनके समर्थकों पर लाठी चार्ज कियाथा(तस्वीर में)। पुलिस का कहना है कि बाबा के समर्थकों ने ही रामलीला मैदान में जमा लोगों को पुलिस केखिलाफ भड़काया था। दिल्ली पुलिस का आरोप है कि पुलिस जब बाबा के मंच पर पहुंचने की कोशिश करने लगीतो उनके समर्थक पुलिस पर पत्थर फेंकने लगे थे। पुलिस का कहना है कि जब रामदेव के समर्थक पत्थरबाजीकरने लगे तो पुलिस को मजबूरन जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी और उसने सिर्फ आंसू गैस के गोले छोड़े।
सूत्रों के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को देर रात तक वकीलों के साथ माथापच्ची कर जवाब तैयार किया है।बताया जाता है कि यह जवाब 25 पन्नों का है और इसमें कही गई बातों के पक्ष में जरूरी दस्तावेज लगाए गए हैं।सूत्र यह भी बताते हैं कि रामलीला मैदान में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद फुटेज की सीडी भी बनाई गई है। जवाबमें कहा गया है कि उस रात 1 बजे पुलिस के वरिष्ठ अफसरों ने यह बताने के लिए रामदेव से संपर्क किया था किरामलीला में लोगों के जमावड़े को गैरकानूनी करार दिया गया है। पुलिस ने 2.20 मिनट पर पहली बार कार्रवाई कीऔर वह भी तब जब खुद उन पर हमला हुआ।
बाबा रामदेव द्वारा काले धन को वापस लाने के मांग के लिए शुरू किए गए अनशन को 24 घंटे भी नहीं बीते थे किरामलीला मैदान में योग शिविर पर दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई कर योग गुरू को दिल्ली से बाहर भेज दिया था। इसघटना के बाद सुप्रीम कोर्ट, मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय महिला आयोग और दिल्ली नगर निगम ने दिल्ली पुलिससे जवाब मांगा है। पुलिस के मुताबिक चार जून की रात की घटना में 72 लोग घायल हुए थे जिसमें 23 पुलिस वालेभी शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट ने बीते 6 जून को केंद्रीय गृह सचिव जी के पिल्लई और दिल्ली पुलिस आयुक्त बी केगुप्ता को नोटिस जारी कर पूछा था कि किन परिस्थितियों में रामदेव और उनके समर्थकों को रामलीला मैदान सेजबरन हटाया गया। जस्टिस बी एस चौहान और जस्टिस स्वतंत्र कुमार की बेंच ने बाबा रामदेव के खिलाफ पुलिसकी कार्रवाई से जुड़ी मीडिया में आ रही खबरों का स्वत: संज्ञान लिया था।
दिल्ली पुलिस आयुक्त ने बीते 5 जून को कहा था कि योग गुरू का प्रदर्शन 'राष्ट्र के लिए खतरा' बन गया था ऐसे मेंबाबा को रामलीला मैदान छोड़ने को कहा गया क्योंकि प्रदर्शनकारियों की संख्या 50 हजार तक पहुंच गई थी।पुलिस का कहना है कि बाबा रामदेव ने रामलीला मैदान में योग शिविर आयोजित करने की इजाजत ली थी लेकिनयह राजनीतिक रैली में तब्दील हो गई।
दिल्ली पुलिस ने रामलीला मैदान से रामदेव और उनके समर्थकों को ताकत के बल पर खदेड़े जाने का जवाब आजसुप्रीम कोर्ट में पेश कर दिया। वैसे, कोर्ट ने इसके लिए 20 जून तक का समय दिया था। पुलिस ने अपनी रिपोर्ट मेंबाबा रामदेव के खिलाफ की गई कार्रवाई और रामलीला मैदान से जबरन हटाए जाने का बचाव किया है। पुलिस नेकहा है कि रामलीला मैदान में योग शिविर की इजाजत थी लेकिन इसका इस्तेमाल अन्य मकसद से किया जा रहाथा। पुलिस के मुताबिक बाबा रामदेव के खिलाफ किसी तरह का बल प्रयोग या लाठी चार्ज नहीं किया गया था।लेकिन मीडिया में आई तस्वीरों से साफ है कि पुलिस ने रामदेव के शिविर में उनके समर्थकों पर लाठी चार्ज कियाथा(तस्वीर में)। पुलिस का कहना है कि बाबा के समर्थकों ने ही रामलीला मैदान में जमा लोगों को पुलिस केखिलाफ भड़काया था। दिल्ली पुलिस का आरोप है कि पुलिस जब बाबा के मंच पर पहुंचने की कोशिश करने लगीतो उनके समर्थक पुलिस पर पत्थर फेंकने लगे थे। पुलिस का कहना है कि जब रामदेव के समर्थक पत्थरबाजीकरने लगे तो पुलिस को मजबूरन जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी और उसने सिर्फ आंसू गैस के गोले छोड़े।
सूत्रों के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को देर रात तक वकीलों के साथ माथापच्ची कर जवाब तैयार किया है।बताया जाता है कि यह जवाब 25 पन्नों का है और इसमें कही गई बातों के पक्ष में जरूरी दस्तावेज लगाए गए हैं।सूत्र यह भी बताते हैं कि रामलीला मैदान में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद फुटेज की सीडी भी बनाई गई है। जवाबमें कहा गया है कि उस रात 1 बजे पुलिस के वरिष्ठ अफसरों ने यह बताने के लिए रामदेव से संपर्क किया था किरामलीला में लोगों के जमावड़े को गैरकानूनी करार दिया गया है। पुलिस ने 2.20 मिनट पर पहली बार कार्रवाई कीऔर वह भी तब जब खुद उन पर हमला हुआ।
बाबा रामदेव द्वारा काले धन को वापस लाने के मांग के लिए शुरू किए गए अनशन को 24 घंटे भी नहीं बीते थे किरामलीला मैदान में योग शिविर पर दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई कर योग गुरू को दिल्ली से बाहर भेज दिया था। इसघटना के बाद सुप्रीम कोर्ट, मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय महिला आयोग और दिल्ली नगर निगम ने दिल्ली पुलिससे जवाब मांगा है। पुलिस के मुताबिक चार जून की रात की घटना में 72 लोग घायल हुए थे जिसमें 23 पुलिस वालेभी शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट ने बीते 6 जून को केंद्रीय गृह सचिव जी के पिल्लई और दिल्ली पुलिस आयुक्त बी केगुप्ता को नोटिस जारी कर पूछा था कि किन परिस्थितियों में रामदेव और उनके समर्थकों को रामलीला मैदान सेजबरन हटाया गया। जस्टिस बी एस चौहान और जस्टिस स्वतंत्र कुमार की बेंच ने बाबा रामदेव के खिलाफ पुलिसकी कार्रवाई से जुड़ी मीडिया में आ रही खबरों का स्वत: संज्ञान लिया था।
दिल्ली पुलिस आयुक्त ने बीते 5 जून को कहा था कि योग गुरू का प्रदर्शन 'राष्ट्र के लिए खतरा' बन गया था ऐसे मेंबाबा को रामलीला मैदान छोड़ने को कहा गया क्योंकि प्रदर्शनकारियों की संख्या 50 हजार तक पहुंच गई थी।पुलिस का कहना है कि बाबा रामदेव ने रामलीला मैदान में योग शिविर आयोजित करने की इजाजत ली थी लेकिनयह राजनीतिक रैली में तब्दील हो गई।

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