असीमानंद के खिलाफ आरोपपत्र दखिल. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 21 जून 2011

असीमानंद के खिलाफ आरोपपत्र दखिल.

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने सोमवार को कट्टरपंथीहिंदुत्ववादी कार्यकर्ता नब कुमार सरकार उर्फ स्वामी असीमानंदएवं अन्य चार के खिलाफ यहां की अदालत में आरोपपत्र दखिलाकिया। आरोपपत्र में इन सभी को समझौता एक्सप्रेस में हुएविस्फोट के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। हरियाणा के पानीपतशहर के निकट फरवरी 2007 में हुए इस विस्फोट में 68 लोगों कीमौत हो गई थी और 12 घायल हो गए थे।

एनआईए के वकील अहमद खान ने यहां बताया कि एनआईए कीविशेष न्यायाधीश कंचन माही की अदालत में दाखिल किए गएइस आरोपपत्र में कहा गया है कि स्वामी असीमानंद विस्फोट केमास्टरमाइंड थे तथा उन्होंने अन्य चार को इस आतंकवादीकार्रवाई के लिए उकसाया था। उन्होंने कहा कि इस मामले में हिंदुत्ववादी कार्यकर्ता साध्वी प्रज्ञा की भूमिका कीजांच भी की जा रही है।



असीमानंद ने पिछले महीने यहां की अदालत से कहा था कि समझौता एक्सप्रेस बम विस्फोट में उनकी कोईभूमिका नहीं है। इस रेलगाड़ी में सवार अधिकांश यात्री पाकिस्तानी थे। उन्होंने एनआईए पर आरोप लगाया था किवह उनका बयान लेने के लिए उन्हें मानसिक शारीरिक तौर पर प्रताड़ित कर रही है। आरोपपत्र में जिन अन्यचार लोगों के नाम हैं उनमें लोकेश शर्मा, संदीप डांगे, रामचंद्र कालासांग्रा तथा सुनील जोशी शामिल हैं। इनमें सेशर्मा को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। डांगे और कालासांग्रा दोनों फरार हैं तथा जोशी की मौत हो चुकीहै। दक्षिणपंथी हिंदूवादी संगठन अभिनव भारत के सदस्य असीमानंद को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने पिछलेवर्ष 19 नवम्बर को वर्ष 2007 में हैदराबाद में मक्का मस्जिद में हुए विस्फोट के सिलसिले में उत्तराखण्ड के हरिद्वारसे गिरफ्तार किया था। इस विस्फोट में 14 लोग मारे गए थे। एनआईए ने असीमानंद से 18 फरवरी 2007 को यहांसे 160 किलोमीटर दूर औद्योगिक नगरी पानीपत के निकट दीवाना गांव में समझौता एक्सप्रेस में हुए विस्फोट मेंउनकी भूमिका के बारे में पूछताछ की थी।

भारत और पाकिस्तान के बीच शांति योजना के तहत चलाई जा रही समझौता एक्सप्रेस के दो डिब्बों में विस्फोटहुआ था। यह रेलगाड़ी दिल्ली से अटारी जा रही थी जो भारतीय सीमा पर अंतिम स्टेशन है। इस रेलगाड़ी में सवारयात्रियों को अगले दिन 19 फरवरी को पाकिस्तान स्थित लाहौर पहुंचना था। एनआईए ने भगोड़ों रामजी औरसंदीप डांगे के खिलाफ 10-10 लाख रुपये और एक संदिग्ध अमित उर्फ प्रिंस का पता लगाने के लिए दो लाख रुपयेका इनाम का घोषित कर रखा है। समझौता एक्सप्रेस में बम विस्फोट की जांच पहले जीआरपी और हरियाणापुलिस का विशेष जांच दल कर रहा था, लेकिन बाद में गृह मंत्रालय के 26 जुलाई, 2010 के आदेश के बादएनआईए ने 29 जुलाई, 2010 को इस मामले की जांच शुरू की थी।

एनआईए ने अपराधियों द्वारा रची गई साजिश का पता लगाने के लिए दिल्ली, हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखण्ड और मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों में जांच की। जांच के दौरान कई गवाहोंऔर संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ की गई और सबूत एकत्रित किए गए। एनआईए द्वारा लगभग एक साल की जांचके बाद पता चला कि यह साजिश वर्ष 2005 से 2007 के बीच अभियुक्त स्वामी असीमानंद, सुनील जोशी औरउनके सहयोगियों रामचंद्र, संदीप डांगे, लोकेश शर्मा और अन्य द्वारा गुजरात, मध्य प्रदेश और अन्य स्थानों पररची गई थी।

जांच से यह भी पता चला कि असीमानंद देश के मंदिरों गुजरात के अक्षरधाम, जम्मू के रघुनाथ मंदिर औरवाराणसी के संकट मोचन मंदिर पर हुए जेहादी हमलों से काफी विचलित थे। वह इस बात पर सुनील जोशी औरअपने अन्य सहयोगियों के साथ अपनी नाराजगी प्रकट करते रहते थे। आरोपपत्र में कहा गया है कि धीरे-धीरेउनके मन में केवल जेहादी आतंकवादियों, बल्कि अल्पसंख्यक समुदाय के प्रति बदले की भावना पैदा हो गई।इसका परिणाम यह हुआ कि असीमानंद ने 'बम के बदले बम' का सिद्धांत अपना लिया। इसी के तहत हमले केलिए समझौता एक्सप्रेस रेलगाड़ी को चुना गया, क्योंकि उसमें यात्रा करने वाले अधिकांश यात्री पाकिस्तानी होतेहैं। आरोपपत्र में कहा गया है कि इस मामले में कुछ और लोगों की भूमिका होने के बारे में संदेह उत्पन्न हुआ हैऔर इसलिए मामले की जांच चलती रहेगी।

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