
आरक्षण विधेयक को लेकर बुधवार को बुलायी गयी सर्वदलीय बैठक बेनतीजा ही रही. विधेयक के मौजूदा स्वरूप को लेकर गतिरोध जारी है। महिला आरक्षण विधेयक पर सर्वसम्मति बनाने के लिए भले ही लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने बुधवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है लेकिन इस विधेयक का विरोध कर रहे राजनीतिक दलों ने साफ कर दिया है कि वह मौजूदा स्वरूप में इस विधेयक को स्वीकार नहीं करेंगे।
इस विधेयक के जरिए राज्य विधानसभाओं और संसद में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें आरक्षित करने की व्यवस्था है. समाजवादी पार्टी (सपा), जनता दल (युनाइटेड) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रस्तावित विधेयक के मौजूदा स्वरूप का विरोध कर रहे हैं. ये दल आरक्षण के भीतर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण की व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।
लोकसभा अध्यक्ष की ओर से बुलाई गई बैठक में भाग लेने पहुंचे लोकसभा में जद (यु) के नेता रामसुंदर दास ने कहा कि हमारा रुख पहले जैसा ही है, लेकिन यदि सरकार नया प्रस्ताव लेकर आती है तो हम उस पर विचार कर सकते हैं. राजद के एक वरिष्ठ नेता ने कि पहले ही दिन से हमारा रुख स्पष्ट है. हम ओबीसी महिलाओं के लिए भी आरक्षण चाहते हैं और हमारी यह मांग बरकरार रहेगी. मार्च में राज्यसभा में पारित किए गए महिला आरक्षण विधेयक को सत्ताधारी कांग्रेस और उसके घटक दलों तथा प्रमुख विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और वाम दलों का समर्थन था।
बुधवार की बैठक में भाजपा की ओर से वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और सुषमा स्वराज ने हिस्सा लिया तथा मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की ओर से बासुदेव आचार्य ने.
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