तस्करी की शिकार युवतियों को नौकरी. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 22 जून 2011

तस्करी की शिकार युवतियों को नौकरी.


तस्करी की शिकार हुई झारखण्ड की लगभग 50 युवतियों ने शायद ही कभी सोचा हो कि वे दोबारा सम्मानपूर्वक जीवन व्यतीत कर पाएंगी, लेकिन सीआरपीएफ से मिले प्रशिक्षण ने उन्हें अपने जीवन की नई शुरूआत की दिशा दे दी है। इस प्रशिक्षण के बाद ये युवतियां अब सरकारी स्कूल और कई औद्योगिक घरानों में बतौर सुरक्षाकर्मी काम कर रही हैं।एक्शन अगेंस्ट ट्रैफिकिंग एंड सैक्शुअल एक्स्प्लॉइटेशन ऑफ चिल्ड्रन एंड वुमेन के प्रदेश संयोजक संजय कुमार मिश्रा ने बताया कि रांची जिले के बुरमू में सीआरपीएफ 50 से भी ज्यादा युवतियों को सुरक्षा प्रशिक्षण दे रही है।
इनमें से ज्यादातर महिलाओं को अब शासकीय कस्तूरबा गर्ल्स स्कूल में सुरक्षाकर्मी का काम मिल गया है, जबकि कई औद्योगिक घराने भी इन महिलाओं को अपनी परियोजनाओं से जोड़ रहे हैं। इन 50 महिलाओं के अलावा प्रदेश में तस्करी का शिकार हुई कई और लड़कियां भी प्रशिक्षण के बाद बेहतर जीवन बिता रही हैं। ऐसी ही एक युवती सहिता ने बताया कि मुझसे दिन में 14 से 16 घंटे काम कराया जाता था। मुझे कहीं जाने नहीं दिया जाता था। मैं एक तरह से जेल में कैद थी, जहां मेरा शारीरिक शोषण भी होता था। 2008 में मुझे एनजीओ ने बचाया। ऐसी ही कहानी सविता कुजूर की भी है। सविता ने बताया कि मैं झारखंड के एक दूरदराज के गांव की हूं, जो मानव तस्करी के लिए पहचाना जाता है। जब मैं इसका शिकार हुई, तो मैं स्कूल की छात्रा थी। श्रम विभाग की आयुक्त आराधना पटनायक ने बताया कि जब इन युवतियों को दिल्ली और कोलकाता जैसे शहरों से छुड़ाया गया, तो लंबे समय तक शारीरिक शोषण का शिकार होने के कारण इनकी मानसिक स्थिति सामान्य नहीं थी। आराधना ने बताया कि तस्करी का शिकार हुई लड़कियों को बचाने के बाद हमने उन्हें सर्वशिक्षा अभियान और राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना द्वारा संचालित स्कूलों में भेजा, जहां पूरा ध्यान पुनर्वास पर दिया जाता है।

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