यू पी से आरक्षण के प्रदर्शन पर से रोक हटा. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 19 अगस्त 2011

यू पी से आरक्षण के प्रदर्शन पर से रोक हटा.

प्रकाश झा निर्देशित फिल्म आरक्षण को उत्तर प्रदेश में प्रदर्शन की अनुमति देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य द्वारा उसके प्रदर्शन पर लगाए गए प्रतिबंध को निरस्त कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि जीवंत लोकतंत्र में सार्वजनिक बहस और असहमति जरूरी है।

न्यायमूर्ति मुकुंदकम शर्मा और न्यायमूर्ति एआर दवे की पीठ ने उत्तर प्रदेश में फिल्म के प्रदर्शन पर दो महीने के लिए लगाए गए प्रतिबंध को निरस्त कर दिया। पीठ ने कहा कि यह पाबंदी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लोकतांत्रिक मूल्य के खिलाफ जाएगी।
यद्यपि उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने फैसले का बचाव किया। वहीं इस फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने वाले पंजाब और आंध्र प्रदेश ने शीर्ष अदालत से कहा कि उन्होंने पहले ही फिल्म के प्रदर्शन की अनुमति देने का फैसला किया है। 

पीठ ने कहा कि लोकतंत्र में और खासतौर पर हमारे जैसे जीवंत लोकतंत्र में उसके निर्बाध रूप से चलने के लिए सार्वजनिक चर्चा जरूरी है। न्यायमूर्ति शर्मा ने अपने आदेश में कहा कि दरअसल, इस तरह की चर्चा लोकतंत्र के प्रभावशाली तरीके से काम करने के लिए सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता लाती है। जब इस तरह की सार्वजनिक चर्चा होती है और असहमति होती है तो समझदारी भरा जनमत तैयार होता है जो हमारे समाज के लिए जरूरी है। शीर्ष अदालत ने फिल्मकार प्रकाश झा की रिट याचिका पर यह आदेश दिया। उन्होंने फिल्म के प्रदर्शन को निलंबित करने के उत्तर प्रदेश, पंजाब और आंध्र प्रदेश सरकार के फैसले को चुनौती दी थी।

शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश के वकील यूयू ललित की उन दलीलों को खारिज कर दिया कि फिल्म के प्रदर्शन से शांति भंग होगी और राज्य में कानून व्यवस्था प्रभावित होगी। ललित ने दलील दी कि राज्य को कानून एवं व्यवस्था के हित में फिल्म के प्रदर्शन को निलंबित करने का अधिकार है। भले ही केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने इसके लिए हरी झंडी दी हो। पीठ ने कहा कि फिल्म का पहले ही इस तरह की भावनाओं के लिए संवेदनशील राज्यों समेत अन्य सभी राज्यों में प्रदर्शन किया जा चुका है। पीठ ने फिल्म के प्रदर्शन की अनुमति देने का राज्य को निर्देश देते हुए कहा कि कानून व्यवस्था बहाल करने का काम राज्य का है। उसे कारगर और सार्थक तरीके से कानून व्यवस्था को बहाल करना चाहिए।

शीर्ष अदालत ने वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे की उस राय से सहमति जताई कि राज्य सिर्फ असाधारण मामलों में ही फिल्म के प्रदर्शन को निलंबित कर सकता है। साल्वे फिल्म निर्माता की ओर से पेश हुए थे। पीठ ने कहा कि पूर्व सेंसरशिप की शक्ति सिर्फ सीबीएफसी में है।

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