शिलांग में राष्ट्रीय हिंदी विकास सम्मलेन की तैयारी. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 16 अगस्त 2011

शिलांग में राष्ट्रीय हिंदी विकास सम्मलेन की तैयारी.

पूर्व के स्काटलैंड के रूप में प्रसिद्ध मेघालय की राजधानी शिलांग में भी हिन्दी का खासा प्रभाव है. पहाड़ियों पर बसे इस खूबसूरत शहर में पूर्वोत्तर हिन्दी अकादमी, हिन्दी के विकास और विस्तार में लगी है. पूर्वोत्तर हिन्दी अकादमी की स्थापना 1990 में हुई थी. अकादमी वहाँ के अहिन्दी भाषी लोगों के मन हिन्दी के प्रति लगाव की भावना जगाकर हिन्दी से जोड़ने के लिए प्रयासरत है. ये संस्था पूर्वोत्तर की स्थानीय भाषाओँ जैसे खासी, बोरो, असमी, मणिपुरी और बंगला के विकास और समन्वय के लिए भी काफी काम कर रही है.

भारतीयता के बृहद उद्देश्य से काम कर रही इस संस्था के उद्देश्यों में कला और संस्कृति का प्रचार भी शामिल है. अपने कार्यक्रमों के माध्यम से अकादमी उत्तर पूर्व के राज्यों के साथ देश के अन्य राज्यों में सांस्कृतिक आदान प्रदान के द्वारा राष्ट्रीय एकता को भी विकसित कर रही है. अपनी खूबसूरती के लिए मशहूर मेघालय की राजधानी शिलांग में अगले साल फिर से हिन्दी का महा कुम्भ लगेगा. हिन्दी के इस महा कुम्भ का आयोजन पूर्वोत्तर भारत में हिन्दी के लिए समर्पित संस्था पूर्वोत्तर हिन्दी अकादमी द्वारा किया जायेगा. इस सम्मलेन के लिए अकादमी ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी है. इसमे हिन्दी के लेखकों और हिन्दी के सेवियों का सम्मान भी किया जायेगा.
पूर्वोत्तर हिन्दी
अकादमी द्वारा 25 मई 2012 से 27 मई 2012 तक मेघालय की राजधानी शिलांग में राष्ट्रीय हिन्दी विकास सम्मलेन का आयोजन किया जायेगा. इस चार दिवसीय सम्मलेन में देश विदेश के हिन्दी लेखक, साहित्यकार, रचनाकार, हिन्दी सेवी और हिन्दी प्रेमी भाग लेंगे. उल्लेखनीय है अकादमी द्वारा 2011 में आयोजित हिन्दी विकास सम्मलेन काफी सफल रहा था. इसमे केन्द्रीय राज्य मंत्री सुश्री अगाथा संगमा ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज करी थी

इस बार
सम्मलेन में डॉ.महाराज कृष्ण जैन की एग्यारह्वीं पुण्यतिथि के अवसर पर हिन्दी लेखकों और हिन्दी सेवियों का सम्मान भी किया जायेगा. सम्मलेन में भाग लेने वाले लोग पूर्वोत्तर भारत के प्राकृतिक सौन्दर्य और सांस्कृतिक परम्पराओं से रूबरू हो सके इस हेतु अकादमी ने एक दिन स्थानीय पर्यटन के लिए सुरक्षित रखा है. इस तरह ये सम्मलेन हिन्दी के विकास के साथ साथ हिन्दी भाषी समाज को पूर्वोत्तर भारत से जोड़ने के लिए सेतु की भूमिका भी निभाएगा

इस सम्मलेन
में भाग लेने के इच्छुक व्यक्तियों के लिए पूर्व पंजीयन आवश्यक है. पंजीयन के लिए अकादमी के सचिव से इस पते पर संपर्क किया जा सकता है। -
डॉ.अकेलाभाइ,सचिव, पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी, पो. ररन्जा, शिलांग 793006, मेघालय.

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