अन्ना हजारे की गिरफ्तारी पर दोनों सदनों में हंगामे के बाद लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने इस मसले पर प्रधानमंत्री के बयान की मांग की है। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री का बयान मंजूर नहीं है। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि सदन के अंदर और बाहर सरकार शोषणकारी नीतियों पर उतर आई है। उन्होंने सरकार की भर्त्सना करते हुए कहा कि एक अहिंसक आंदोलन को इस तरह से कुचलना कहां तक सही है?
उन्होंने कहा कि जब मैंने सदन में इस मसले पर बयान देना चाहा तो संसदीय कार्य मंत्री समेत कांग्रेस के अन्य सदस्यों ने मुझे बयान देने नहीं दिया। सत्ता पक्ष की काम सदन को चलाना होता है न कि सदन की कार्यवाही को बाधित करना। सुषमा स्वराज ने अन्ना हजारे की गिरफ्तारी का विरोध करते हुए कहा कि यह अलोकतांत्रिक है और यह इमरजेंसी की याद दिलाते हैं। इससे पहले मंगलवार को संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही जैसे ही शुरू हुई तो अन्ना हजारे की गिरफ्तारी को लेकर भारी हंगामा हुआ। जिसके बाद दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। लोकसभा की कार्यवाही आधे-आधे घंटे के लिए दो बार स्थगित की गई, लेकिन बाद में भी सदन की कार्यवाही नहीं चल सकी।
राज्यसभा में पहले एक घंटे के लिए और बाद में दिन भर के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी गई। जब दूसरी बार राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हुई तो हाथापाई की नौबत आ गई, जिसके बाद सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गयी। हजारे की गिरफ्तारी की खबर के बीच जब मंगलवार को संसद की कार्यवाही शुरू हुई तो दोनों सदनों में प्रमुख विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी ने प्रश्नकाल को रोके जाने और अन्ना हजारे पर चर्चा की मांग की। लेकिन प्रश्नकाल स्थगित करने की मांग को दोनों सदनों के अध्यक्षों ने अस्वीकार करते हुए विपक्ष के नेता को अपनी बात कहने का मौका दिया। लेकिन भारी हंगामे के बीच वे अपनी बात नहीं कह पाए।

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