गुजरात उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को आईपीएस अधिकारी राहुल शर्मा की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने उन आधारों का विवरण मांगा था, जिसके लिए राज्य सरकार ने इस साल फरवरी में उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था। उन्हें 2002 के दंगा मामलों में फोन कॉल रिकाडर्स की सीडी विभिन्न एजेंसियों को प्रदान करने को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
मामले की सुनवाई कर रहीं न्यायमूर्ति अभिलाषा कुमारी ने कहा कि अदालत ऐसी स्थिति में हस्तक्षेप करने को उचित नहीं पाती, जब याचिकाकर्ता के पास अपील का वैकल्पिक वैधानिक प्रावधान उपलब्ध है।
अदालत ने कहा कि याचिका में याचिकाकर्ता के किसी मौलिक अधिकार के उल्लंघन का भी खुलासा नहीं किया गया है। डीआईजी रैंक के अधिकारी शर्मा को गत पांच फरवरी को राज्य के गृह विभाग ने कारण बताओ नोटिस जारी किया था। उनसे पूछा गया था कि बगैर सरकार की अनुमति के 2002 के दंगों से संबंधित फोन कॉल रिकॉडर्स की सीडी नानावती आयोग और एसआईटी समेत विभिन्न एजेंसियों को सौंपने के लिए क्यों न उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए।
शर्मा ने गुरुवार को दायर अपनी याचिका में कहा था कि जब उन्होंने राज्य सरकार से पूछा कि किस आधार पर मामले में उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया तो उसने इस संबंध में उन्हें सूचना देने से इंकार कर दिया।

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