बंबई हाईकोर्ट ने पुणे के घोड़ा कारोबारी हसन अली खान को यह कहते हुए जमानत दे दी कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मामले में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे दर्शाया जा सके कि उनके द्वारा जमा किया गया धन अपराध से हासिल किया गया है।
हसन अली को गत मार्च में करोड़ों रुपए के धन शोधन घोटाले के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। न्यायमूर्ति ए. एम. थिप्से ने 53 वर्षीय हसन को पांच लाख रुपए के मुचलके पर जमानत देते हुए कहा कि प्रवर्तन निदेशालय ने हसन के खिलाफ जो मामला बनाया है उसमें अपराध से धन हासिल करने का कोई तत्व नहीं है और वह जमानत पर रिहा किए जाने के हकदार है।
हसन को प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था और उसके खिलाफ धन शोधन निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। अदालत ने हालांकि उसे प्रतिदिन प्रवर्तन निदेशालय के समक्ष उपस्थित होने और मुंबई या पुणे में रहने का निर्देश दिया है। प्रवर्तन निदेशालय की ओर से उपस्थित अतिरिक्त सॉलीसीटर जनरल डेरियस खंबट्टा ने अदालत से अनुरोध किया कि वह एक हफ्ते के लिए जमानत आदेश पर रोक लगाए ताकि एजेंसी इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सके।
न्यायमूर्ति थिप्से ने हालांकि यह कहते हुए दलील को ठुकरा दिया, इस बात की कोई आशंका नहीं है कि वह (हसन) फरार हो जाएगा या सबूतों के साथ छेड़छाड़ करेगा। इसलिए जमानत आदेश पर रोक लगाने की कोई आवश्यकता नहीं है। अदालत ने इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय से कहा था कि वह इस बात का पता लगाए कि क्या हसन अली ने कथित तौर पर जो धन जमा कर रखा है, वह अपराध से हासिल किया गया है।

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