सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी में न्यूनतम योग्यता प्रतिशत सामान्य श्रेणी के छात्रों की तुलना में अधिक से अधिक 10 फीसदी कम होना चाहिए।
न्यायमूर्ति आरवी रवींद्रन की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि ओबीसी श्रेणी के छात्रों के लिए योग्यता मानदंड का फैसला सामान्य श्रेणी में दाखिला पाने वाले अंतिम उम्मीदवार के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। पीठ ने हालांकि स्पष्ट किया कि मौजूदा शैक्षणिक सत्र में विश्वविद्यालयों में जो दाखिले पहले ही हो चुके हैं उससे कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। शीर्ष अदालत का स्पष्टीकरण आईआईटी मद्रास के पूर्व प्रोफेसर पीवी इंद्रेसन की ओर से दायर याचिका पर आया है। उन्होंने विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में ओबीसी आरक्षण को लागू करने में अनियमितता के मद्देजनर शीर्ष अदालत से निर्देश देने को कहा था।

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