मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा राइट टू रीकॉल–के विचार को खारिज करने के एक दिन बाद कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि सरकार टीम अन्ना के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। चुनाव सुधार पर सर्वदलीय विचार-विमर्श के दौरान यह मुद्दा सामने आ सकता है। खुर्शीद ने सोमवार को यहां भारत और इंडिया,चुनौतियां और आकांक्षाएं– विषय पर एक सेमिनार को संबोधित करते हुए कहा कि एक मजबूत लॉबी हमसे राइट टू रिजेक्ट– सिस्टम को पेश करने के विषय पर प्रश्न कर रही है।
अमेरिका और यूरोप में राइट टू रीकॉल– के प्रावधानों से प्रेरित होकर कुछ लोग विशेषकर म्युनिसिपल चुनावों के लिए यह मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे संसदीय क्षेत्र में जहां 15 लाख मतदाता हों। वहां राइट टू रीकॉल– के लिए एक लाख या 50 हजार मतदाताओं के हस्ताक्षर को सत्यापित करना आसान काम नहीं है। फिर भी हम इस मुद्दे पर विचार कर रहे हैं।
विधि मंत्री ने कहा कि मंत्रालय ने इस विषय पर नोट तैयार किया है। हमारी चुनाव आयुक्त से भी चर्चा हुई है। चुनाव आयुक्त ने मीडिया से बातचीत में आपत्ति व्यक्त की है लेकिन हम इस विषय को सर्वदलीय विचार-विमर्श के दौरान रखेंगे। विभिन्न दलों के नेताओं की उपलब्धता को ध्यान में रखने के बाद सर्वदलीय बैठक इस महीने या नवंबर में हो सकती है। गौरतलब है कि चुनाव सुधार पर मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी ने एक चैनल को दिए गए इंटरव्यू में कहा था कि वह लोगों को निर्वाचित प्रतिनिधियों को राइट टू रिजेक्ट– या उन्हें राइट टू रीकॉल– का अधिकार देने के पक्ष में नहीं हैं क्योंकि इस तरह के नियम देश को अस्थिर कर देंगे।
टीम अन्ना के सदस्य और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश संतोष हेगड़े ने कहा कि जन लोकपाल बिल की तरह चुनाव सुधार पर व्यापक बहस होनी चाहिए। उन्होंने जानना चाहा कि भारत में राइट टू रिकॉल–और राइट टू रिजेक्ट– जैसे विषयों पर काम क्यों नहीं हो रहा है? वे यहां मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाय कुरैशी के उस बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि इस तरह का कोई भी कदम देश को अस्थिर करेगा। हेगड़े ने कहा कि 2004-09 के बीच 540 सदस्यों में से 174 ने ही लोकसभा में अपने विचार रखे। उन्होंने सवाल किया कि यदि वे संसद की बहस में शामिल नहीं हो रहे थे तो कर क्या रहे थे? अतः लोकसभा सचिवालय और विधानसभा सचिवालयों को निर्वाचित प्रतिनिधियों के वार्षिक कामकाज का लेखाजोखा प्रकाशित करना चाहिए।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने टीम अन्ना के राइट टू रिकॉल–के प्रस्ताव का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि यह विषय जेपी आंदोलन के सामने आया था। इसको लागू करने के लिए संविधान संशोधन समेत सभी संभावनाओं पर काम किया जाना चाहिए।

1 टिप्पणी:
har halat mein yeh dono kanoon bane...deshhit mein hai yeh kanoon...aur jaise bihar mein vidhayak cota khatam kiya gayaa hai...waise hee pure desh mein MLA/PM fund khatam honi chahiye saath hee sarkari tender ko net par khule taur par diya jana chahiye...taaki iske aad mein desh ko jo karodo/arabo ka nuksan ho rahaa hai uss se bhi bacha jaa sake...
एक टिप्पणी भेजें