बुधवार को उगते सूर्य को दूसरा अर्घ्य देने के साथ ही सूर्य उपासना का महापर्व छठ संपन्न हो गया. लोक आस्था के महापर्व छठ के चौथे दिन आज प्रात: विभिन्न नदी, तालाबों, नहरों पर बने घाटों पर जाकर तथा आवासीय प्रांगण एवं घर की छतों पर कृत्रिम रूप से बनाए गए कुंड में लाखों की संख्या में व्रतियों द्वारा भगवान भास्कर को दूसरा अर्घ्य देने और छठी मैया की पूजा के साथ यह पर्व संपन्न हो गया.
छठ पर्व के चौथे एवं अंतिम दिन आज पौ फटने से पूर्व ही व्रती और उनके परिजन अपने-अपने घरों से पूजा सामग्रियों के साथ नदी तालाब के किनारे स्थित विभिन्न घाटों पर पहुंचे. व्रती पानी में खड़े होकर पूजा सामग्रियों से भरे सूप हाथों में लिए और भगवान भास्कर को पूरी श्रद्धा के साथ दूसरा अर्घ्य दिया.
छठ के अवसर पर व्रतियों द्वारा भगवान भास्कर को दूसरा अर्घ्य देने के साथ ही उनका छत्तीस घंटे का उपवास भी समाप्त हो गया. उन्होंने प्रसाद ग्रहण किया और इसी के साथ ही वत और उपवास का चार दिनों तक चलने वाला यह पर्व संपन्न हो गया.

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