स्वामी अग्निवेश को सुप्रीम कोर्ट की फटकार. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 8 नवंबर 2011

स्वामी अग्निवेश को सुप्रीम कोर्ट की फटकार.

अमरनाथ श्रद्धालुओं पर स्वामी अग्निवेश की कथित विवादास्पद टिप्पणी पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोगों की भावनाओं को हल्के में नहीं लिया जा सकता और अगर उन्होंने यह बयान दिया है तो वह ‘बच नहीं सकते।’ अग्निवेश ने अपने खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को खारिज करने के लिए कोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने अपने मामले में और समय की मांग की जिसके बाद न्यायमूर्ति एच.एल दत्तू और न्यायमूर्ति सी.के प्रसाद की पीठ ने मामले को सोमवार तक के लिए टाल दिया।

पीठ ने कहा, ‘आप लोगों की भावनाओं को हल्के में नहीं ले सकते।’ पीठ ने कहा कि हर साल बड़ी संख्या में लोग जम्मू कश्मीर में अमरनाथ यात्रा पर जाते हैं। गौरतलब है कि अग्निवेश ने कथित रूप से अमरनाथ यात्रा को ‘धार्मिक पाखंड’ कहा था और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अपने खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की अग्निवेश की याचिका खारिज कर दी थी। अग्निवेश ने अदालत के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि अगर अग्निवेश ने यह टिप्पणी की है, तो वह ‘बच नहीं सकते’। कोर्ट ने कहा कि लोगों को सार्वजनिक जगहों पर बयान देने में सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि लोगों की भावनाएं आहत हो सकती हैं। पीठ ने कहा, ‘लोगों को सार्वजनिक तौर पर बोलने से पहले दस बार सोच लेना चाहिए।’

मई में जम्मू के दौरे में अग्निवेश ने कहा कि उन्हें ‘यह समझ में नहीं आता कि लोग ऐसी यात्राओं पर क्यों जाते हैं’ और उन्होंने अमरनाथ गुफा में बनने वाले ‘शिवलिंग’ को ‘भौगोलिक घटना’ बताया था। न्यायालय की पीठ ने कहा कि मामले की जांच चल रही है और इस वक्त हस्तक्षेप करने की कोई जरूरत नहीं है। लेकिन अग्निवेश की ओर से पेश हुए पूर्व सॉलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम ने न्यायालय में शपथपत्र दायर करने के लिए एक हफ्ते का समय मांगा। सुब्रमण्यम ने कहा कि अग्निवेश के बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया और उन्होंने इसके तुरंत बाद स्पष्टीकरण दे दिया था। उन्होंने कहा, ‘यह बयान श्रद्धालुओं के लिए की गई व्यवस्था के संदर्भ में दिया गया था। इसका मकसद लोगों की भावनाओं को आहत करना नहीं था।’

1 टिप्पणी:

Dr Jawahar Laal Raina ने कहा…

Sahi Hai!! Baba ji ko Sanatan Dharm k Naam par dukandaari chalate huey is k khilaaf bolne ka koi haq nahi hai. kanoon ko apna kaam karne do.