जमशेदपुर स्थित एनएमएल(National Metallurgical Laboratory) ने इलेक्ट्रानिक कचड़े के निष्पादन का एक बेहतर तरीका खोज निकाला है. जिसे भारत सरकार की मंजूरी भी मिल गयी है. अब बेकार पड़े टीवी, मोबाइल, लैपटॉप इत्यादि सामानों से सोना, चाँदी, कांस्य कई धातु एवं चीनी मिटटी, शीशा भी निकाले जा सकेंगे.
एनएमएल ने इलेक्ट्रोनिक कचड़े के निष्पादन के लिए कोरिया इंस्टीट्यूट ऑफ जिओसाइन्स एंड मिनरल रिसोर्सेज और कोरिया मेरीटाइम यूनिवर्सिटी के साथ समझौता किया है. पर्यावरण और इलेक्ट्रानिक कचड़े के निष्पादनके लिए एनएमएल द्वारा किये गए कार्यों को देख अमेरिका और रूस ने भी भारत सरकार के माध्यम से संपर्क साधा है. मुख्य रूप से प्रिंटेड सर्किट से किस तरह दुर्लभ धातु को निकला जाये इस पर एनएमएल के वैज्ञानिक लगे हुए हैं.
बेकार हार्ड डिस्क से दुर्लभ नीयोडियम अलग करने की विधि भी एनएमएल ने विकसित किया है. चीन ने इन दुर्लभ धातुओं के निर्यात पर रोक लगा दी है जिससे दावा कंपनियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. नीयोडियम का प्रयोग कैसर की दवाओं में किया जाता है. बेकार मोबाइल फोन से लिथियम और कोबाल्ट अलग करने की विधि भी एनएमएल ने खोज निकाली है. लिथियम न्यूरो की दवाइयों को बनाने में तथा कोबाल्ट का प्रयोग कैंसर के मरीजों को रेडिएशन में किया जाता है.

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