राइट टु रिकॉल कानून व्यावहारिक नहीं. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 2 नवंबर 2011

राइट टु रिकॉल कानून व्यावहारिक नहीं.


चुनाव आयोग ने कहा है कि राइट टु रिकॉल प्रस्ताव से चुनाव प्रणाली में अस्थिरता आ सकती है। बार-बार चुनाव की नौबत आ जाएगी। इस बारे में आयोग ने टीम अन्ना को अपनी राय बता दी है। 

टीम अन्ना की ओर से शांति भूषण मुख्य चुनाव आयुक्त एस. वाई. कुरैशी और आयोग के मेंबर वी. एस. संपथ और एच. एस. ब्रह्मा से चुनाव सुधार के बारे में विचार-विमर्श करने गए थे। 

मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि राइट टु रिकॉल जैसे कानून के सहारे हारा हुआ उम्मीदवार पहले दिन से ही इस दिशा में प्रयास शुरू कर देगा जिससे अस्थिरता आएगी। यह व्यावहारिक नहीं है। राइट टु रिकॉल के लिए जनप्रतिनिधित्व कानून 1951 में संशोधन करने की जरूरत पड़ेगी। 

आयोग की ओर से यह भी कहा गया कि साल 2001 में ही एक प्रस्ताव पहले ही सरकार के पास भेजा जा चुका है जिसके तहत बैलेट पेपर में कुछ ऐसा प्रावधान हो जिसके तहत मतदाता के पास किसी भी उम्मीदवार को न चुनने का विकल्प हो। चुनाव आयोग ने सिविल सोसाइटी से आग्रह किया कि वे चुनाव में अधिक वोट कराने की मुहिम को सपोर्ट करें। अन्ना हजारे ने अगस्त में अनशन समाप्त करने के बाद कहा था कि जन लोकपाल के बाद उनका अगला प्रयास चुनाव सुधार होगा। इसी कड़ी में टीम अन्ना ने आयोग से यह मुलाकात की थी।

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