जीएमटी अब इतिहास बनकर रह जायेगा. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 3 नवंबर 2011

जीएमटी अब इतिहास बनकर रह जायेगा.


ग्रीनविच मीन टाइम (जीएमटी) पिछले 120 साल से ज्यादा समय से दुनिया—भर में समय का अंतरराष्ट्रीय मानक रहा है, लेकिन अब इसके आस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। दुनिया भर के शीर्ष वैज्ञानिक ब्रिटेन में गुरुवार को एक बैठक कर रहे हैं जिसमें एक प्रस्ताव पारित कर जीएमटी को इतिहास में समेटने पर विचार किया जा सकता है। जीएमटी पर खतरा समय की नयी परिभाषा की वजह से हुआ है जोकि पथ्वी के घूर्णन पर नहीं, बल्कि परमाणु घड़ी पर आधारित है। 

जनवरी 2012 में अंतरराष्ट्रीय टेलीकम्युनिकेशन यूनियन जिनेवा में बैठक कर इन नये कदम को अपनाने के सवाल पर वोट डालेगी। ब्रिटेन इसका विरोध कर रहा है। पश्चिमोत्तर लंदन में आज से शुरू हो रही दो दिन की बैठक में प्रतिष्ठित रॉयल सोसाइटी के बैनर तले 50 विशेषज्ञ इससे जुड़े कुछ मुददों पर विचार विमर्श करेंगे।
संभवत: इस सवाल से ब्रिटेन के राष्ट्रीय स्वाभिवान को धक्का पहुंचा है क्योंकि यहां के लोगों का मानना है कि उनका चिर प्रतिद्वंद्वी फ्रांस जीएमटी के बदले समय के नये मानक के लिए बदलाव की अगुवाई कर रहा है।

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