संयुक्त बलों को दूसरी बार चकमा देते हुए शीर्ष माओवादी नेता कोटेश्वर राव उर्फ किशनजी अपनी एक महिला साथी के साथ पश्चिमी मेदिनीपुर जिले से झारखंड भाग निकला।
छापेमार विरोधी बल के एक शीर्ष अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया कि इस बात की बहुत ज्यादा संभावना है कि किशनजी अपने कुछ साथियों के साथ झाड़ग्राम के नलबानी, लालबानी और खुशबानी के घने जंगल में छिपा हुआ है।
संयुक्त बल पांच माओवादी ग्राम रक्षा दस्ते के सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद से चौकस हुए थे। यह दस्ता किशनजी जैसे शीर्ष नेता को बचाने के लिए आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले चार घेरों में से सबसे बाहरी घेरा होता है। अधिकारी ने कहा कि जब हमने बाहरी घेरे को तोड़ा तो हमारे द्वारा क्षेत्र को पूरी तरह सील करने से पहले किशनजी और सुचित्रा झारखंड भाग निकले।
सीआरपीएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हमारी जानकारी के मुताबिक, राज्य समिति के सदस्य शशधर महतो की मार्च 2011 में मौत होने के बाद पिछले एक वर्ष से किशनजी सुचित्रा के साथ रह रहा है। किशनजी इससे पहले मार्च 2010 में भी एक मुठभेड़ में कथित तौर पर घायल होने के बाद भाग निकला था।

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