जून 2004 के चर्चित इशरत जहां एनकाउंटर मामले में गुजरात उच्च न्यायालय ने सोमवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए एनकाउंटर को फर्जी करार दिया है। इसके साथ ही अदालत ने मामले से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ नई एफआरआई दर्ज कराने का फैसला सुनाया है। इस मामले में मुठभेड़ के असली-नकली के बिंदु पर पड़ताल करने वाले विशेष जांच दल (एसआईटी) ने बीते सप्ताह ही अपनी रिपोर्ट न्यायालय में सौंपी थी।
न्यायाधीश जयंत पटेल एवं अभिलाषा कुमारी की पीठ ने पिछली सुनवाई में जांच दल के काम पर संतोष जताया था। एसआईटी ने सीलबंद कवर में अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंपी थी। सूत्रों के अनुसार यह अंतरिम रिपोर्ट थी क्योंकि एंकाउंटर स्थल पर रि-कंस्ट्रक्शन की अंतिम कवायद के बाद एफएसएल रिपोर्ट नहीं मिली थी।
पूर्वी अहमदाबाद के नरोडा इलाके में 15 जून 2004 को पुलिस के साथ मुठभेड़ में मुंबई की इशरत जहां व अन्य लोग मारे गए थे। एंकाउंटर के बाद पुलिस ने दावा किया था कि ये कुख्यात आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तोयबा (एलईटी) के आतंकी थे और मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को निशाना बनाने के मंसूबे के साथ आए थे। हालांकि पीडि़तों के परिजनों ने एंकाउंटर को फर्जी बताते हुए केस की सीबीआई जांच की मांग के साथ हाईकोर्ट की शरण ली थी। अदालत ने मामला विशेष जांच दल को सौंपा था।

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