अरविंद केजरीवाल ने आईआरएस सेवा से अपने इस्तीफा से संबंधित मसले के समाधान के लिए गुरुवार को नौ लाख से अधिक रुपए की राशि सरकार को सौंप दी। साथ ही उन्होंने कहा कि वह विरोध स्वरूप ऐसा कर रहे हैं और इसका यह मतलब नहीं कि उन्होंने कोई गलती मानी है।
केजरीवाल ने नौ लाख 27 हजार 787 रुपए के चेक के साथ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को एक पत्र लिखकर उनसे मैग्सेसे पुरस्कार विजेता हरीश हांडे समेत अपने छह मित्रों को परेशान नहीं करने का आग्रह किया है। उन्हीं लोगों ने केजरीवाल को यह राशि उधार दी है।
43 वर्षीय केजरीवाल के इस कदम को टीम अन्ना पर हो रहे हमलों के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। गौरतलब है कि सरकार की ओर यह कहा गया था कि केजरीवाल ने आईआरएस में तीन साल पूरे होने से पहले ही सेवा छोड़ पूरे वेतन पर अध्ययन अवकाश पर जा कर अनुबंध नियमों का उल्लंघन किया है। केजरीवाल का कहना है कि उन्होंने गैर-वैतनिक अवकाश लिया और अनुबंध की शर्तों को पूरा करने के बाद सेवा छोड़ी। उन्होंने प्रधानमंत्री को लिखे चार पन्नों के पत्र में कहा कि मैं पत्र के साथ नौ लाख 27 हजार 787 रुपए का चेक भी भेज रहा हूं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मैंने गलती मानी है। जब मुझे यही नहीं पता कि मैंने क्या गलती की है, तो इसे मानने का सवाल ही नहीं उठता। केजरीवाल ने लिखा कि मैं इस राशि को विरोध के तौर पर लौटा रहा हूं। मैं आपसे अपील करता हूं कि आप गृह मंत्री को मेरा इस्तीफा मंजूर करने का निर्देश दें। मेरा इस्तीफा मंजूर हो जाने के बाद मेरे पास इस राशि को वापस लेने के लिए अदालत जाने का अधिकार होगा।

2 टिप्पणियां:
वाह ! ये हुई न खरी खरी । अब सरकार में हिम्मत हो तो वो भी अपने मंत्रियों के हलक में हाथ डाल कर जनता का पैसा उगलवा के दिखा दे ..
in beimanon ki aankh kab khulegi kaladhan desh ko saunpne ke liye himmat dikhayen ye chor neta
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