
भारत और इजरायल ने भविष्य के अपने द्विपक्षीय सम्बंधों को बढ़ाने के लिए एक खाका तैयार करते हुए मंगलवार को प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर किए। साथ ही दोनों देशों ने आतंकवाद की चुनौती से निपटने के लिए एक संयुक्त रणनीति बनाने का फैसला किया। विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र एवं महान संस्कृति के रूप में भारत की प्रशंसा करते हुए इजरायल के राष्ट्रपति शिमोन पेरेस ने विस्तारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया। वहीं, भारतीय विदेश मंत्री एस.एम. कृष्णा ने इजरायल के अपने समकक्ष एवं उप प्रधानमंत्री अविगडोर लीबरमैन के साथ व्यापार एवं निवेश बढ़ाने, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, संयुक्त राष्ट्र सुधारों और वैश्विक आर्थिक संकट सहित कई मुद्दों पर चर्चा की।
वार्ता के बाद भारत और इजरायल ने प्रत्यर्पण संधि और सजायाफ्ता कैदियों के हस्तांतरण से सम्बंधित एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इजरायल ने बेंगलुरू में अपना एक वाणिज्य दूतावास खोलने का भी निर्णय लिया। कृष्णा की दो दिनों की इजरायल यात्रा मंगलवार शाम समाप्त हुई। पिछले 11 सालों में किसी भारतीय विदेश मंत्री की यह पहली इजरायल यात्रा है। अपनी यात्रा के दौरान कृष्णा ने शिमोन के अलावा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की और उनके साथ बहुआयामी सम्बंधों को मजबूत बनाने वाली रूपरेखा पर चर्चा की। कृष्णा ने विज्ञान के सभी मोर्चे पर भारत को इजरायल का एक स्वभाविक सहयोगी बताते हुए द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच वर्तमान व्यापार पांच अरब डॉलर से बढ़ाने की जरूरत है।
पेरेस ने कहा, "हमारे लिए भारत सबसे पहले एक संस्कृति है। उसके बाद वह विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र और फिर लोकतंत्र में कमजोर हुए बिना गरीबी मिटाने में अविश्वसनीय सफलता हासिल करने वाला है।" शिमोन ने कहा, "मेरी शुभकामना है कि भारत सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनेगा।" उन्होंने कहा, " हम काफी जिम्मेदारी एवं दिलचस्पी से भारत का अनुसरण कर रहे हैं और हम ऐसा केवल राजनीतिक भावना के लिए नहीं कर रहे, बल्कि विश्व के नागरिक होने के नाते हमारा मानना है कि भारत और चीन के बगैर भुखमरी दुनिया पर शासन करेगी।" वहीं, कृष्णा ने शिमोन को एक 'क्षमतावान राजनेता' बताया और खाद्य उत्पादन में आत्म-निर्भरता हासिल करने के लिए इजरायल की एक प्रेरणा के रूप में प्रशंसा की। कृष्णा ने कहा, "मेरा मानना है कि दोनों देशों के नेतृत्व के लिए यह उपयुक्त समय है कि वे आगामी दशकों के लिए एक एजेंडा निर्धारित करें। इसलिए, मेरा मानना है कि इस भावना के तहत मैं यहां आया हूं।" कृष्णा ने अपने भाषण में जोर देकर कहा कि प्रत्येक युद्ध के बाद इजरायल एक मजबूत राष्ट्र के रूप में उभरा है।
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