राष्ट्रपति के अभिभाषण पर संसद में जवाब देते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सहयोगी दलों तृणमूल कांग्रेस और डीएमके की चिंताओं को दूर करने की भरसक कोशिश की। इसी का परिणाम था कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर एनसीटीसी को लेकर बीजेपी का संशोधन प्रस्ताव गिर गया। तृणमूल कांग्रेस और बीएसपी के सांसद वोटिंग के दौरान गैरहाजिर रहे।
प्रधानमंत्री ने लोकसभा में कहा कि रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी का इस्तीफा उन्हें मिल गया है और इसे वह राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेज देंगे। इसके साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि नया रेल मंत्री जल्द ही बन जाएगा। तृणमूल कांग्रेस की दूसरी चिंता एनसीटीसी पर प्रधानमंत्री ने कहा कि आतंकवाद एक गंभीर चुनौती है और इससे निपटने के लिए यह जरूरी है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस बारे में राज्यों को विश्वास में लिया जाएगा। प्रधानमंत्री ने बताया कि 16 अप्रैल को मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाई गई है और उसमें उन्हें एनसीटीसी के बारे में विस्तार से बताया जाएगा। मनमोहन सिंह ने कहा कि एनसीटीसी पर राज्यों को भरोसे में लिया जाएगा।
श्रीलंकाई तमिलों के मुद्दे पर डीएमके की चिंता को भी प्रधानमंत्री ने दूर करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि भारत सरकार श्रीलंकाई तमिलों को लेकर चिंतित है और श्रीलंका सरकार के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में अमेरिकी प्रस्ताव का समर्थन करेगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि हालांकि अभी तक अमेरिकी प्रस्ताव का ड्राफ्ट नहीं मिला है। गौरतलब है कि रविवार को डीएमके के मुखिया एम. करुणानिधि के घर हुई अनौपचारिक मीटिंग में पार्टी ने सैद्धांतिक रूप से फैसला लिया था कि अगर केंद्र सरकार संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में अमेरिकी प्रस्ताव का समर्थन नहीं करेगी, तो उसके मंत्री इस्तीफा दे देंगे।
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