तीन दशक बाद दरभंगा में ध्रुपद. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 16 मार्च 2012

तीन दशक बाद दरभंगा में ध्रुपद.


करीब तीन दशक के लंबे अंतराल के बाद बिहार में दरभंगावासियों को फिर से ध्रुपद संगीत की विभिन्न शैलियों को सुनने का शानदार मौका मिलेगा। 

स्पिक मैके के दरभंगा चैप्टर द्वारा कला संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार सरकार एवं पूर्व क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, कोलकाता के सहयोग से कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के सिनेट हॉल में आगामी 20-21 मार्च को दो दिवसीय ध्रुपद समारोह का आयोजन किया गया है।

स्पिक मैके के दरभंगा चैप्टर के समन्वयक सुनील कुमार मिश्रा एवं विश्वविद्यालय के कार्यक्रम संयोजक डां0 रीता सिंह ने शुक्रवार को बताया कि छात्रों को भारतीय शास्त्रीय संगीत एवं संस्कृति और सभ्यता से अवगत कराने के उद्देश्य से ध्रुपद समारोह का आयोजन किया जा रहा है। विश्वविद्यालय के दरबार हॉल में ध्रुपद की अलापचारी एवं पखावज की थाप गुंजने की तैयारी पूरे जोरों पर है।
मिश्रा ने कार्यक्रम की विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि अंतर राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त गुरूओं में पंडित अभय नारायण मल्लिक जहां गौरवानी शैली में पुत्र संजय कुमार मल्लिक के साथ अपनी अलापचारी प्रस्तुत करेंगे, वहीं दूसरी तरफ पंडित रामाशीष पाठक पखावज पर ताल मात्रा की सुमधुर मिश्रण घोलेंगे। पुणे से पधार रहे पंडित उदय भावलकर जी डागरवानी शैली की प्रस्तुति देंगे। 

डां. सिंह ने बताया कि इसके अलावा पंडित रामकुमार मल्लिक एवं पंडित प्रेम कुमार मल्लिक दरभंगा घराने की अलापचारियों से श्रोताओं को मुंत्रमुग्ध करेगे। तार वाद्य में सुरबहार की झंकार पं. पुष्पराज कोष्टी एवं विदेशी तारवाद्य चंलों पर ध्रुपद के अलापचारियों को सुनाने विदुषी नैन्सी कु लकर्णी भी इस मौके पर उपस्थित रहेगी। इस मौके पर स्पिक मैके के संस्थापक और पद्मश्री डां. किरण सेठ और राज्य के कला संस्कृति विभाग के निदेशक विनय कुमार उपस्थित रहेंगे।

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