ब्याज दरों में कटौती नहीं. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 15 मार्च 2012

ब्याज दरों में कटौती नहीं.


भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने गुरुवार को महंगाई को अब भी सबसे बड़ी चिंता बताते हुए मौद्रिक नीति की अर्ध तिमाही समीक्षा में प्रमुख ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखा। रिजर्व बैंक ने कहा कि कच्चे तेल की कीमत बढ़ने के कारण महंगाई का अंदेशा बढ़ गया है। जरूरतों की पूर्ति के लिए देश तेल का बड़े पैमाने पर आयात करता है।  

अप्रैल से नवंबर 2011 की अवधि में नौ फीसदी से अधिक रहने के बाद महंगाई दर दिसंबर माह में 7.7 फीसदी, और जनवरी 2012 में 6.6 फीसदी दर्ज की गई, जबकि फरवरी मे यह फिर से बढ़कर 6.95 फीसदी हो गई। आरबीआई ने एक बयान में फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि वर्तमान व्यापक आर्थिक स्थितियों के मूल्यांकन के आधार पर रेपो दर को 8.5 फीसदी पर बनाए रखने का फैसला किया गया है। रेपा दर वह दर होती है जो रिजर्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों को ऋण देने के एवज में वसूलता है। रिवर्स रेपो दर भी इस फैसले के कारण 7.5 फीसदी पर बनी रही। नकद आरक्षित अनुपात को भी 4.75 फीसदी पर यथावत रखा गया है।

रिजर्व बैंक ने कहा कि भविष्य में दरों में कटौती इस बात पर निर्भर करेगी कि महंगाई की दर कितनी जल्दी सामान्य स्तर पर आ जाती है। विश्लेषकों का अनुमान है कि रिजर्व बैंक 17 अप्रैल को 2012-13 की मौद्रिक नीति की घोषणा में दरों में कटौती का फैसला कर सकता है। बाजार ने रिजर्व बैंक के फैसले पर निराशा जताई और बम्बई स्टॉक एक्सचेंज के 30 शेयरों वाले संवेदी सूचकांक सेंसेक्स में दोपहर के कारोबार में 200 से अधिक अंकों की गिरावट दर्ज की गई। दोपहर 1.10 बजे सेंसेक्स को 229.23 अंक नीचे 17,690.07 पर कारोबार करते देखा गया।