बहुगुणा को पटखनी देने पर भाजपा की निगाह - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 15 अप्रैल 2012

बहुगुणा को पटखनी देने पर भाजपा की निगाह


आगामी छहः माह में प्रदेश की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण!


विधानसभा चुनाव में जहां एक सीट से पिछड़ी थी जिसका भाजपा नेताओं में भारी मलाल हैं। क्योंकि इस एक सीट के अन्तर ने भाजपा को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया और कांग्रेस ने सरकार बना सांसद विजय बहुगुणा को मुख्यमंत्राी की कुर्सी पर बिठा दिया। कांग्रेस ने अपने लिए इस संख्या बल में एक अंक का इजाफा करने की रणनीति बनायी हो लेकिन अब भाजपा कांग्रेस को उसकी इस रणनीति में विफल करने की कोशिशों में जुट गयी हैं।मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के सामने संभालने के 6 माह के भीतर ही एमएलए का चुनाव लड़ना और जीतने की चुनौती समाने खड़ी है। यदि भाजपा मुख्यमंत्री बहुगुणा को इस चुनाव में हरा पाने में सफल हो जाती है तो न सिर्फ भाजपा और कांग्रेस दोनो पार्टिंया 32-32 विधायकों के अंक के साथ बराबरी पर आ जायेंग। वहीं कांग्रेस भले ही सत्ता पर बनी रहे लेकिन उसके सामने नये मुख्यमंत्री के चुनाव का प्रश्न भी पैदा हो जाएगा। राजनैतिक सूत्रों की माने तो एक सीट की बढ़त के कारण ही कांग्रेस को सूबे में सरकार बनाने का मौका मिला हैं। विधायकों की संख्या बराबर होने की स्थिति में भाजपा भी सरकार बनाने का दावा ढोक सकती है और बसपा व निर्दलीय विधायकों को अपने पक्ष में लाकर जो वर्तमान समय में कांग्रेस को अपना सर्मथन दिए हुए हैं को कांग्रेस को बहुमत सिद्ध करने की चुनौती दे सकती हैं। 

भाजपा नेताओं का सारा ध्यान अब आगामी उपचुनाव में मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को पटखनी देने पर टिका हुआ है। इतना ही नहीं बहुगुणा के इस्तीफे से खाली होने वाली टिहरी संसदीय सीट पर भी भाजपा पूरी ताकत झोंकेगी। यह दोनों ही चुनाव भाजपा और कांग्रेस के लिए महत्व के साबित होने वाले है। दोनांे ही दलों ने अब इन चुनावों को लेकर अपनी-अपनी रणनीति बनना शुरू का दिया हैं। कांग्रेस सरकार के गठन के दौरान कांग्रेसी नेताओं में मचा घमासान जिसने कांग्रेस को कई धड़ों में बांट दिया है पार्टी के समस्या बन सकता है। हालांकि भाजपा के अन्दर भी गुटबाजी थमी नहीं है, लेकिन इस मुद्दे पर भाजपा के शीर्ष नेता गंभीर दिखायी दे रहे है और उनके द्वारा राज्य के तमाम नेताओं को यह समझाने के प्रयास किया जा रहा है कि उनकी गुटबाजी के कारण ही वह सत्ता से बाहर हुए हैं उनके पास यह अन्तिम मौका है। जब वह अपनी खोई हुई राजनैतिक जमीन को वापस पा सकते हैं। वहीं भाजपा नेताओं में यह भी गहन मंथन किया जा रहा है कि विजय बहुगुणा किस क्षेत्र से चुनाव लड़ने का फैसला करते हैं। राजनैतिक सूत्रों से संभावनांए कि जा रही है कि उनके लिए किसी निर्दलीय विधायक से सीट खाली करायी जाएगी जहां पर वे चुनाव लड़ सकें। हाल ही में संपन्न हुए चुनावों में सिर्फ तीन ही निर्दलीय विधायक है जो कांग्रेस सरकार को समर्थन दिए हुए हैं। भाजपा की दूसरी रणनीति में विजय बहुगुणा के मुकाबले वह छवि का प्रत्याशी मैदान में उतरने पर विचार कर रहे है जो हर हाल में जीत भाजपा को जीत दिला सके। सूत्रों की माने तो पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी का नाम चर्चाओं में है जो विधानसभा चुनाव में कोटद्वार से चुनाव हार गए थे। 

वहीं भाजपा के महामंत्री लाखीराम जोशी भी मुख्यमत्रंी विजय बहुगुणा के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए ताल ठांेकते नजर आ रहे हैं लेकिन भाजपा उन्हें दमदार प्रत्याशी नहीं मान रही, वह 2002 और 2007 में लगातार दो बार चुनाव हार चुके है वहीं भाजपा ने उन्हें 2012 में टिकट नहीं दिया था। कांग्रेस और मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के लिए यह दोनों ही चुनाव उनके भविष्य का फैसला करने वाले चुनाव साबित होंगे। मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा चुनाव हारने की स्थिति में न सिर्फ अपनी संसदीय सीट से हाथ धो बैठेंगे बाल्कि उनके हाथ मुख्यमंत्री पद चला जाएगा। ऐसी स्थिति में उनका राजनीतिक भविष्य दावं होना स्वाभाविक हैं। हाईकमान को उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया है कि वह अपनी संसदीय सीट पर भी कांग्रेस प्रत्याशी को जिताकर भेजेंगे। अगर वह ऐसा नहीं कर पाते तो बहुगुणा को धक्का लग सकता है कांग्रेस के अन्दर जिस तरह की गुटबाजी हैं उसे देखते हुए बहुगुणा के लिए यह काम आसान नहीं होगा। कांग्रेस ने उनके लिए एक आसान सीट की तलाशनी शुरू कर दी है जहां से वह चुनाव जीत सकें। आने वाले छहः माह उत्तराखंड की राजनीति के लिए न सिर्फ बड़े महत्व के होंगे बल्कि इस दौरान भारी बदलाव व राजनीतिक उथल-पुथल भी संभव हैं।


(राजेन्द्र जोशी)

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