आंत्रिक संगठन बनाकर आकाओं की शरण में नेता
सरकार की स्थिरता के बाद लालबत्ती की जुगत में नेताओं के आगे चरणवंदना शुरू हो गई है। दर्जनों कांग्रेसी नेता लालबत्त की दौड़ में अपने-अपने आकाओं की चरणवंदना शुरू कर चुके हैं और इनमें कई नेता ऐसे भी हैं जो कांग्रेस में विभिषण की भूमिका के साथ-साथ कांग्रेस के ग्राफ को नीचा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।
सरकार की स्थिरता के बाद इन नेताओं ने सत्ता में आते ही लालबत्ती के लिए घेराबंदी शुरू कर दी है और एक आंत्रिक संगठन बनाकर लालबत्ती के लिए दबाव बनाना भी शुरू कर दिया है। सरकार में लालबत्ती दिए जाने का प्रचलन तेजी से बढ़ता जा रहा है। पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के शासनकाल में भी तिवारी सरकार की तरह लालबत्तीयों की बाढ़ लगा दी गई थी, लेकिन वर्तमान मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा लालबत्तीयों की भरमार प्रदेश में न करने की बात कह चुके हैं, लेकिन उत्तराखण्ड कांग्रेस में ऐसे नेता जो बेशर्म सिपाही की तरह सरकार को 2007 में नुकसान पहुंचा चुके हैं वह अब लालबत्ती की कतार में खड़े हुए हैं।
लालबत्ती को लेकर चरणवंदना कोई नई बात नहीं, लेकिन कांग्रेस में दबाव बनाकर जिस तरह से लालबत्ती को लेने के लिए खेल शुरू हो गया है, वह कांग्रेस के लिए निकट भविष्य में चुनौती के रूप में सामने आ सकता है। राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि लालबत्ती की भरमार प्रदेश में नहीं की जानी चाहिए और शासन व प्रशासन को चलाने के साथ-साथ सरकार की उपलब्धियों का बखान जनता के बीच करने के लिए जितनी लालबत्तीयों की आवश्यकता है उन्हीं का उत्तराखण्ड में पदार्पण किया जाना चाहिए और ऐसे कार्यकर्ता जिन्होंने पार्टी को संगठन में रहते हुए मजबूती प्रदान की है, उन्हें लालबत्ती से नवाजा जाना चाहिए, लेकिन कांग्रेस के भीतर कई दिनों से ऐसे बेशर्म सिपाही जो कांग्रेस की लुटिया डुबोने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं, उनका लालबत्ती कतार में लगना बेहद खराब माना जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी के शासनकाल में महिला नेत्री सारिका प्रधान, नवीन जोशी, धिरेन्द्र प्रताप सहित दर्जन भर से अधिक नेता वर्तमान में लालबत्ती के लिए चरणवंदना करने में लगे हैं और सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेस की एक महिला नेत्री जो तिवारी सरकार में लालबत्ती लेकर काफी विवादों में रही वर्तमान में कांग्रेस की कबिना मंत्री अमृता रावत के दरबार में हाजिरी लगा चुकी हैं, लेकिन वहां से सम्मानजनक परिणाम न आने के बाद अब उनका रूख एनडी तिवारी की तरफ हो गया है।
इसके साथ ही कई अन्य राजनेता भी हरीश रावत, हरक सिंह रावत, सतपाल महाराज, यशपाल आर्य, विजय बहुगुणा के इर्द गिर्द अपना ग्राफ बढ़ाने में लग गए हैं और चरणवंदना के साथ-साथ नेताओं के सामने अपने नंबर बढ़ाते हुए देखे जा रहे हैं। माना जा रहा है विजय बहुगुणा विधानसभा का चुनाव जीतने के बाद लालबत्तीयों की बरसात प्रदेश में कर सकते हैं और छहः माह से पहले ही विधानसभा का चुनाव पर्वतीय सीट से लड़कर विधायक बनना चाहते हैं। सूत्र यह भी बता रहे हैं कि विधानसभा सीट का नाम फाईनल कर दिया गया है, लेकिन कांग्रेस हाईकमान अभी कई अन्य बिंदुओं को लेकर प्रदेश के अन्य नेताओं से भी विचार-विमर्श करना चाहती है और मुख्यमंत्री चयन के बाद जिस तरह से प्रदेश में कांग्रेस की स्थिति खराब हुई है, उसे लेकर भी राज्य हित में तालमेल बनाना जरूरी समझ रही है। भाजपा विजय बहुगुणा के खिलाफ खण्डूडी चुनावी समर में उतारेगी या नहीं अभी इस पर भी ससपेंस बरकरार है, लेकिन माना जा रहा है कि खण्डूडी अब पांच साल तक कोई भी चुनाव लड़ने के इच्छुक नहीं है और वह उत्तराखण्ड की राजनीति से तौबा कर चुके हैं। कुल मिलाकर कांग्रेस में लालबत्तीयों को लेकर यदि प्रदेश के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने समर्पित कार्यकर्ताओं को नजर अंदाज किया तो इसका परिणाम कांग्रेस को आगामी होने वाले राज्य के पंचायत चुनाव के साथ-साथ 2014 में होने वाले लोकसभा के चुनाव में भी उठाना पड़ सकता है।
(राजेन्द्र जोशी)

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