पहाड़ से मुफीद हो सकता है विजय का विजयरथ - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 16 अप्रैल 2012

पहाड़ से मुफीद हो सकता है विजय का विजयरथ


मैदानी विधानसभाओं के बजाए प्रदेश के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के लिए पहाड़ से चुनाव लड़ना मुफीद साबित हो सकता है। इसके साथ ही कांग्रेस पर्वतीय क्षेत्रों से विधायकों को चुनकर विधानसभा में भेजने के फार्मूले पर भी जनता का ध्यान खींच सकती है। 2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस के कई दिग्गज पर्वतीय विधानसभाओं को छोड़कर मैदानी जनपदों से विधानसभा चुनाव में लड़कर विधानसभा पहुंचे हैं और पर्वतीय क्षेत्रों में भाजपा व कांग्रेस दोनो के ही दिग्गजों की संख्या बेहद कम है। नेता प्रतिपक्ष रहे हरक सिंह रावत रूद्रप्रयाग से चुनाव लड़कर विधानसभा में जरूर पहुंचे हैं और भाजपा के दिग्गज माने जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद खण्डूडी कोटद्वार से अपना किला बचाने में नाकामयाब साबित हुए हैं। 

उत्तराखण्ड में पर्वतीय क्षेत्रों से भाजपा का किला भी काफी हद तक साफ हो गया है और इन क्षेत्रों में कांग्रेस बढ़त बनाने में कामयाब रही है। जिसे देखते हुए माना जा रहा है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा पर्वतीय सीट से विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे और जनता के बीच पहाड़ का मुख्यमंत्री होने का संदेश कांग्रेस जनता को देना चाहेगी। भाजपा पर्वतीय विधानसभाओं में अपने दिग्गजों के हार जाने के बाद अभी मंथन की स्थिति में जुटी हुई है और विजय बहुगुणा के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रही। इसके पीछे 2012 के विधानसभा चुनाव की हार का कारण प्रमुख रूप से उभरकर सामने आ रहा है और मुख्यमंत्री के लिए वर्तमान में पांच विधानसभा सीटों से विधायक सीट खाली करने के लिए तैयार बैठे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री भाजपा के किसी विधायक से सीट खाली कराकर वहां से चुनाव लड़ने का मन बना चुके हैं और उनकी पहली प्राथमिकता भाजपा के किसी विधायक से सीट खाली कराने की है। लेकिन वर्तमान परिस्थितियां बता रही हैं कि भाजपा का कोई भी विधायक सीट खाली करने के लिए तैयार नहीं है। पूर्व में सहसपुर विधानसभा सीट से विधायक सहदेव पुण्डीर के मुख्यमंत्री के लिए सीट खाली करने की चर्चाएं शुरू हुई थी, लेकिन इन चर्चाओं पर विधायक पुण्डीर ने विराम लगा दिया था। अब वर्तमान में मसूरी से विधायक गणेश जोशी एवं लैंसडोन से भाजपा विधायक दिलीप रावत के मुख्यमंत्री के लिए सीट छोड़ने की चर्चाएं लगातार जारी हैं, लेकिन भाजपा विधायक दिलीप रावत ने सिर्फ खण्डूडी के लिए सीट छोड़ने की बातें कहीं है। 

राजनैतिक विश्लेषक मानकर चल रहे हैं वर्तमान में कांग्रेस के राजनैतिक हालात बेहद खराब हैं और मुख्यमंत्री को विधानसभा का चुनाव जीतना है, ऐसे में यदि भाजपा के किसी विधायक से सीट खाली कराकर मुख्यमंत्री वहां से चुनाव लड़ते हैं तो आसानी से जीत दर्ज करने के साथ-साथ जीत का अंतर भी काफी बढ़ाया जा सकता है। इसी फार्मूले को ध्यान में रखकर मुख्यमंत्री इसी रणनीति पर आगे बढ़ते हुए दिख रहे हैं, यदि प्रदेश में भाजपा विधायक मुख्यमंत्री के लिए सीट छोड़ता है तो यह पहला अवसर होगा जब सत्ता पक्ष के लिए विपक्ष का विधायक सीट छोड़ेगा। भाजपा के भीतर भी अंतरविरोध काफी बढ़ गया है और इसी कारण से अभी तक भाजपा नेता प्रतिपक्ष का चयन नहीं कर पाई है। विधानसभा का मार्च माह में आयोजित हुआ विधानसभा का सत्र बिना नेता प्रतिपक्ष के ही चलाना पड़ा और इससे भाजपा की देशभर में काफी किरकिरी हुई और यह भी साबित हो गया कि भाजपा के भीतर अभी भी लगातार जंग जारी है। 

राजनैतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि मैदान की बजाए पहाड़ की विधानसभा से मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के लिए विजय पताका फहराना बेहद आसान होगा। वर्तमान में गंगोत्री विधायक विजयपाल सजवाण, नरेन्द्र नगर विधायक सुबोध उनियाल, द्वाराहाट विधायक मदन बिष्ट मुख्यमंत्री के लिए सीट छोड़ने को तैयार बताए जा रहे हैं और कुमांउ से मदन बिष्ट को छोड़कर अभी तक किसी भी विधायक ने सीट छोड़ने की बात सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के लिए विधानसभा का चुनाव आपसी लड़ाई के चलते बेहद महत्वपूर्ण होगा और राजनैतिक जमीन को मजबूत करने की भी चुनौती सामने होगी। कुल मिलाकर मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के लिए पहाड़ से विधानसभा चुनाव जीतना बेहद मुफीद साबित हो सकता है। 

(राजेन्द्र जोशी)

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