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| मुकेश भरतीय |
रांची, अपने वेबसाइट ‘www.raznama.com’ पर एक व्यवसायी, राजनेताओं एवं प्रशासन के आला अधिकारियों के विरूध्द लिखने वाले वेबसाइट संचालक व स्वतंत्र पत्रकार मुकेश भरतीया को पुलिस ने गुरुवार की देर रात ब्लैकमेलिंग करने एवं रंगदारी मांगने के आरोप में एक खतरनाक मुजरिम की तरह गिरफ्तार कर लिया। पुलिस पर आरोप है कि उसने मुकेश भरतीया के घर की घेराबंदी कर बगल के मकान की छत के रास्ते उसके घर में प्रवेश किया और उसे गिरफ्तार कर आज जेल भेज दिया।
पुलिस का तर्क है कि मुकेश भरतीया के विरूध्द कांके रोड के श्री राम गार्डन निवासी एक बड़े व्यवसायी पवन बजाज ने उनके कार्यालय में आकर 15 लाख रुपए की रंगदारी मांगने एवं नहीं देने पर वेबसाइट पर खबर प्रसारित कर देने की धमकी देने का आरोप लगाते हुए गोंदा थाने में एक प्राथमिकी दर्ज करायी है। पुलिस का कहना है कि ‘www.raznama.com’ पर मुकेश भरतीया ने खबर प्रसारित की है जिसमें बगैर प्रमाण के उसने व्यवसायी पर एक बड़े व्यवसायी की पंचवटी प्लाजा में हुए हत्याकांड के अभियुक्त रहने के अलावा एक अंग्रेजी दैनिक सहित कई अधिकारियों व राजनेताओं के विरूध्द ऐसी बातें लिखी हैं जो आपत्तिजनक है। यह आईटी एक्ट के धारा 66 एवं 67 का उल्लंघन है और गैर जमानतीय मामला है। इसके अलावा व्यवसायी द्वारा रंगदारी मांगे जाने की प्राथमिकी दर्ज कराये जाने के कारण मुकेश भरतीया के विरूध्द भादवि की धाराओं 387 एवं 388 के तहत मामला बनता है। इधर मुकेश भरतीया को इस तरह गिरफ्तार किये जाने पर पत्रकारों खासकर युवा पत्रकारों के बीच तीखी प्रतिक्रिया हुई है।
पत्रकारों का एक दल आज एसएसपी एवं सिटी एसपी के अलावा अन्य वरीय अधिकारियों से मिला, पर सभी अपना पिंड छुड़ाते नजर आये, किसी ने इस मामले में हस्तक्षेप नहीं किया। अंतत: मुकेश भरतीया को एक खतरनाक मुजरिम की तरह हथकड़ी-रस्सी लगाकर अदालत ले जाया गया जहां पेशी की गयी। इसके विरोध में शाम को कई वरिष्ठ पत्रकारों के साथ युवा पत्रकारों ने मुंह पर काली पट्टी बांधकर कैंडल मार्च किया। पत्रकारों का आरोप है कि झूठा मामला बनाकर मुकेश भरतीया को आनन-फानन में देर रात्रि में उसके घर में छापामारी कर एक खतरनाक मुजरिम की तरह गिरफ्तार कर थाने में लाकर जेल भेजा जाना घोर आपत्तिजनक है।
पत्रकारों ने कहा कि पुलिस द्वारा आरोपों के किसी बिंदु की गहराई से छानबीन एवं मुकेश भरतीया का पक्ष सुने बगैर गिरफ्तार किया जाना एक षड्यंत्र प्रतीत होता है जो मीडिया के लोगों एवं मीडिया की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पत्रकारों का कहना है कि अगर वास्तव में मुकेश भरतीया ने रंगदारी मांगी थी अथवा आपत्तिजनक तरीके से व बगैर प्रमाण के खबर प्रसारित किया था तो पहले पुलिस को जांच करनी चाहिए और अब गिरफ्तारी की जानी चाहिए। ऐसा नहीं करना षड्यंत्र प्रतीत होता है।

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