बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अररिया में महादलितों के लिए जमीन घोटाले का खुलासा होने पर जांच के आदेश दे दिए हैं. यह जमीन घोटाला अररिया जिला के फारविसगंज के रानीगंज इलाके में महादलितों को इन्दिरा आवास मुहैया करने के दौरान हुआ.
नीतीश सरकार ने महादलितों को तेरह सौ छह स्क्वायर फीट जमीन देने की योजना शुरू की थी. सरकार की इन्दिरा आवास योजना के तहत गरीबों और महादलितों को घर बनाने के लिए तीन डिसमिल जमीन दिया जाता है, यदि सरकार के पास जमीन न हो तो सरकार जमीन खरीद कर देती है.
सरकार छह लाख साठ हजार रुपये एकड़ से ज्यादा कीमत पर जमीन नहीं ले सकती थी.जो ज़मीन सरकार पौने चार लाख में ख़रीद सकती थी वह उसे
करीब अठारह लाख में बेची गई.
अररिया में सर्किल ऑफिसर पर आरोप है कि दलालों से मिलकर पहले गाँववालों से सस्ते कीमत पर जमीन खरीदी, फिर इसी ज़मीन को सरकार से चौगुने कीमत पर बेच दिया. सरकार ने ये जमीन महादलितों में बांट दी. सूत्रों के अनुसार अररिया के रानीगंज के सीओ ने अपने रिश्तेदार और उसके कर्मचारियों की मदद से घोटाले को अंजाम दिया. झा के रिश्तेदार और कर्मचारियों ने सस्ते में रामपुर में जमीन ली और उसे सरकार को ऊँचे दाम पर बेच दिया. जिससे सरकार को लाखों रुपये का चूना लगा.
मामले पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जांच के आदेश दे दिए हैं. इस मामले के बाद विपक्ष ने सरकार पर हमला तेज कर दी है. राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने कहा कि बिहार में जंगलराज है, जनता नीतीश के शासन से त्रस्त है. राजद नेता राम कृपाल यादव के मुताबिक बिहार में जिस तरह से लूट खसोट और भ्रष्टाचार मचा है, उससे पूरा बिहार पीड़ित है. गौरतलब है कि यह योजना 2009-10 में शुरू हुई थी और इंदिरा आवास योजना के तहत ज़मीन दी जानी थी. अररिया में 2.18 लाख भूमिहीन परिवारों को 1306 स्क्वायर फुट जमीन दी जानी थी. अब तक इस योजना के तहत 1.53 लाख परिवारों को ज़मीन दी जा चुकी है.
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