कांडा अग्रिम जमानत के लिए हाई कोर्ट पहुंचे . - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 13 अगस्त 2012

कांडा अग्रिम जमानत के लिए हाई कोर्ट पहुंचे .


गीतिका शर्मा खुदकुशी मामले में नाम आने के बाद से फरार चल रहे हरियाणा के पूर्व मंत्री गोपाल गोयल कांडा ने अग्रिम जमानत के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में गुहार लगाई है। कांडा की ओर से वरिष्ठ वकील केटीएस तुलसी ने हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की। कांडा की जमानत पर हाई कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई होगी। 

9 अगस्त को कांडा की अग्रिम जमानत याचिका को निचली कोर्ट ने खारिज कर दिया था। निचली कोर्ट ने कहा था कि पूर्व मंत्री के खिलाफ लगे आरोप गंभीर हैं और वह जांच को प्रभावित कर सकते हैं। कांडा पर गीतिका को खुदकुशी के लिए उकसाने का आरोप है। गीतिका उनकी एमडीएलआर एयरलाइन की पूर्व एयरहोस्टेस थीं।

गोपाल कांडा ने अपने दफ्तरों और दूसरे ठिकानों पर उन सबूतों को नष्ट कराने की पूरी कोशिश कराई है, जो उसे गीतिका शर्मा की प्रताड़ना के साथ जोड़ते हैं। कंप्यूटर हार्ड डिस्क, रेकॉर्ड, और भी बहुत कुछ टूटा-फूटा या खराब हालत में मिला है। लेकिन फिर भी पुलिस के हाथ काफी मटीरियल लग चुका है, जो कांडा को सलाखों के पीछे पहुंचाने के लिए काफी है। लेकिन वह है कहां? इस सवाल पर पुलिस अफसरों के पास आज भी कोई जवाब नहीं है। कांडा की तरफ से बेल की एक और कोशिश किए जाने के कयास पहले ही लगाए जा रहे थे।

सूत्रों के मुताबिक कांडा के यहां रेड्स के दौरान कई अहम चीजें गीतिका केस के लिहाज से पुलिस के हाथ लगी हैं। लेकिन पुलिस को उतना सब नहीं मिला, जितना वह चाहती थी। अब टूटी फूटी चीजों को जोड़कर निकालने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ेगी और फिर भी सही चीजें मिलेंगी, कहना मुश्किल है। छटपटाती पुलिस सुबह भी कांडा की तलाश में लगी थी।

गीतिका के परिजन पुलिस पर जांच की दिशा बदलने का आरोप लगा रहे हैं। गीतिका के भाई अंकित शर्मा का कहना है कि दिल्ली पुलिस कांडा को पकड़ने पर ध्यान केंद्रित करने की बजाए मृतका के चरित्र पर सवाल उठाकर जांच की दिशा को भटका रही है। इससे मुख्य आरोपियों को लाभ मिल सकता है। उन्होंने एक बार फिर मामले की जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपने की मांग की है। दिल्ली के लाजपत नगर के एक नर्सिंग होम में गीतिका के गर्भपात करवाने के बयान पर गीतिका के परिजन बेहद नाराज हैं। नॉर्थ-वेस्ट जिले के डीसीपी डॉ. पी करुणाकरण का कहना है कि पुलिस कानून के मुताबिक अपना काम कर रही है। उनका कहना है कि सचाई का पता लगाने के लिए जिन सबूतों की जरूरत है, उनका पता लगाना पुलिस की जांच टीम की जिम्मेदारी है। इसे आचरण या किसी अन्य अर्थों में नहीं लेना चाहिए।

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