भारतीय रिजर्व बैंक ने सतर्कता भरा रुख अपनाते हुए सोमवार को नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में 0.25 प्रतिशत की कटौती कर दी। इससे बैंकिंग तंत्र के पास उधारी देने और अन्य जरूरतों के लिए 17,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी उपलब्ध होगी।
केंद्रीय बैंक ने महंगाई की ऊंची दर की वजह से नीतिगत ब्याज दरों में बदलाव नहीं किया है। केंद्रीय बैंक द्वारा आज पेश मौद्रिक नीति की मध्य तिमाही समीक्षा में रेपो और रिवर्स रेपो दरों को कायम रखा गया है, जबकि उद्योग जगत इसका बेसब्री से इंतजार कर रहा था।
सरकार ने पिछले सप्ताह ही काफी समय से लंबित सुधारों को लागू करने की घोषणा की है। केंद्रीय बैंक द्वारा भी सीआरआर में कटौती का यह कदम उसके कुछ दिन बाद ही उठाया गया है। बैंकों को अपनी जमा का एक निश्चित अनुपात रिजर्व बैंक के पास रखना होता है, उसे सीआरआर कहते हैं। रिजर्व बैंक ने कहा कि इस कदम से देश की अर्थव्यवस्था के उत्पादक क्षेत्रों को उचित मात्रा में ऋण की आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी। इस कटौती के बाद सीआरआर दर 4.5 फीसदी पर आ गई है।
रिजर्व बैंक द्वारा अन्य वाणिज्यिक बैंकों को लघु अवधि के लिए दिए जाने वाले कर्ज की ब्याज दर यानी रेपो दर को 8 प्रतिशत पर कायम रखा गया है। इसी तरह रिवर्स रेपो दर भी 7 फीसदी पर बरकरार है। रिजर्व बैंक के गवर्नर डी़ सुब्बाराव ने मध्य तिमाही मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए कहा कि मुद्रास्फीतिक रुख बरकरार है। ऐसे में मौद्रिक समीक्षा का मुख्य लक्ष्य महंगाई पर अंकुश और मुद्रास्फीतिक संभावनाओं को कम करना है।
अगस्त माह में थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति बढ़कर 7.55 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो जुलाई में 6.87 फीसदी पर थी। रिजर्व बैंक ने कहा है कि सीआरआर में कटौती 22 सितंबर से लागू होगी। सीआरआर में कटौती से बैंकों को अपने कर्ज को सस्ता करने का रास्ता मिलेगी। इससे निवेश की स्थिति में सुधार होगा और वृद्धि दर को प्रोत्साहन मिलेगा।
रिजर्व बैंक द्वारा उठाए गए कदम पर अपनी प्रतिक्रिया में भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन प्रतीप चौधरी ने कहा कि बैंक इस नीतिगत कदम को ध्यान में रखकर अपनी ब्याज दरों की समीक्षा करेगा। उन्होंने कहा कि बैंक की परिसंपत्ति देनदारी समिति (आल्को) की जल्द बैठक होगी, जिसमें ब्याज दरों में संशोधन पर विचार होगा। चौधरी ने कहा कि यह एक सकारात्मक कदम है। मध्य तिमाही की मौद्रिक समीक्षा काफी महत्वपूर्ण है। मुझे लगता है कि केंद्रीय बैंक ने साफ संकेत दे दिया है कि वह कदम उठाना चाहता है और उसे इस बात का ध्यान है कि अर्थव्यवस्था की रफ्तार घट रही है।
केंद्रीय बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति की तिमाही समीक्षा में कहा है कि नकारात्मक निवेश माहौल के बीच वृद्धि दर प्रभावित हुई है। इसमें कहा गया है कि सरकार द्वारा हाल में उठाए गए कदमों से इस नकारात्मक धारणा का रुख पलटेगा। अन्य फैसलों के अलावा सरकार ने डीजल के दाम 5 रुपये प्रति लीटर बढ़ाए हैं। इससे रिजर्व बैंक की इस मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी कि राजकोषीय घाटे पर अंकुश लगाया जाना चाहिए। इसके अलावा सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के नियमसें को भी उदार बनाया है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि डीजल कीमतों तथा एलपीजी पर उठाए गए कदमों से लघु अवधि में महंगाई दर प्रभावित होगी, लेकिन ये कदम उल्लेखनीय उपलब्धि हैं, क्योंकि इससे वृहद आर्थिक आधार मजबूत होगा।
रिजर्व बैंक ने चिंता जताते हुये यह भी कहा है कि रसोई गैस मूल्यों को तर्कसंगत बनाये जाने के बावजूद सब्सिडी पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि प्रशासनिक मूल्यों को अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिहाज से उचित स्तर पर लाने का काम अभी अधूरा ही है। उठाए गए कदमों के बावजूद केंद्रीय बैंक ने कहा है कि उंचे राजकोषीय तथा चालू खाते के घाटे की वजह से ही वह ब्याज दरों में कटौती नहीं कर पाया है। हालांकि, कम आक्रामक रहने का संकेत देते हुए केंद्रीय बैंक ने कहा, मौद्रिक नीति का रुख सावधान और सतर्क तरीके से वृद्धि और महंगाई के बीच संतुलन की निगरानी से तय होगा। साथ ही तरलता की स्थिति के प्रबंधन पर निगाह रहेगी, जिससे उत्पादक क्षेत्रों को उचित मात्रा में ऋण की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
रिजर्व बैंक ने कहा कि फिलहाल थोक और खुदरा दोनों स्तरों पर मुद्रास्फीतिक दबाव मजबूत बना हुआ है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि मुद्रास्फीतिक दबाव को अंकुश में रखना तथा निवेश बढ़ाने के हाल के नीतिगत कदमों को कायम रखना, जिससे निवेश बढ़े, आपूर्ति की स्थिति में सुधार हो और उत्पादकता बढ़े। केंद्रीय बैंक ने हाल में वैश्विक स्तर पर भी तरलता की स्थिति में सुधार पर चिंता जताई है। केंद्रीय बैंक ने कहा है कि इससे जिंसों के दाम बढ़ेंगे, जिससे महंगाई का प्रबंधन मुश्किल होगा।
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