साइबर सर्विलांस एजेंसी की स्थापना होगी. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 17 सितंबर 2012

साइबर सर्विलांस एजेंसी की स्थापना होगी.


हाल के दिनों में इंटरनेट और सोशल मीडिया के दुरुपयोग को ध्यान में रखते हुए सरकार ने त्रिआयामी रणनीति तैयार की है, जिसमें एक साइबर सर्विलांस एजेंसी की स्थापना भी की जानी है जो इस तरह की स्थिति के बारे में पहले ही आगाह करेगी।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन की अध्यक्षता में एक हालिया बैठक में ऐसी स्थिति में अफवाहों को रोकने के लिए टेलीकॉम ऑपरेटर के लिए भी दिशा-निर्देश तैयार करने का फैसला किया गया। जैसा कि पिछले कुछ सप्ताह में इंटरनेट और सोशल मीडिया का इस्तेमाल अफवाह फैलाने के लिए किया गया, खास कर असम में झड़पों के मामले में।

बैठक के ब्यौरे के मुताबिक, इसमें गृह मंत्रालय, पीएमओ, खुफिया एजेंसियों और नेशनल सिक्यूरिटी कौंसिल सेक्रेटरियट (एनएससीएस) के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया और इंटरनेट, सोशल मीडिया पर कुछ सामग्रियों को ब्लॉक करने को लेकर सरकार की कार्रवाई की वैधता, असर पर भी विमर्श किया। बताया गया है कि इस तरह की स्थिति से निपटने के लिए भविष्य में समय रहते मुस्तैदी और सुसंगत तरीके से कदम उठाया जाना चाहिए।

बैठक में प्रभावी निगरानी तंत्र के साथ ही तकनीकी रूप से सक्षम साइबर मॉनिटनिंग और सर्विलांस एजेंसी की बात कही गई जो इंटरनेट और सोशल मीडिया के किसी भी गलत रूप से इस्तेमाल के लिए समय रहते सरकार को आगाह करेगी। इंटरनेट और सोशल मीडिया के दुरुपयोग के लिए इस तरह की स्थिति में सरकार द्वारा मंजूर एक कानूनी व्यवस्था तैयार करने का भी फैसला किया गया जो सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम में मौजूदा खामियों को भी पाटने का काम करेगी।

ऐसी स्थिति से निपटने के लिए सार्वजनिक दिशा-निर्देश और मानक प्रावधान की जरूरत महसूस की गई है। इसमें कहा गया है कि हमारी एजेंसियों को कानूनी और वित्तीय रूप से मजबूत बनाए जाने की जरूरत है ताकि इंटरनेट संबंधी कानूनी प्रावधानों को लेकर स्पष्टीकरण हो। इस कदम से उन इंटरनेट ऑपरेटरों को भी कानून के दायरे में लाया जा सकेगा जो अपने देश के कानून लागू होने का हवाला देते हैं, जहां वे पंजीकृत हैं। बैठक के बाद खुफिया ब्यूरो, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्थान तथा तीन अन्य संस्थानों को वेब, सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक कंटेंट पर नजर रखने को कहा गया।

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