एक सरीखे बुरे होते हैं .... - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 15 सितंबर 2012

एक सरीखे बुरे होते हैं ....


बुराई करने और सुनने वाले !!


आज के जमाने में जीवन लक्ष्यों से भटके हुए फालतू लोगों का चारों तरफ खूब बोलबाला है। अपने इलाके से लेकर दूर-दूर तक ऎसे फालतू लोगों का जमावड़ा है जिनके पास इधर-उधर की करने के सिवा और कोई उद्यम है ही नहीं। इन लोगों की जिन्दगी का एक ही अहम् मकसद होता है - लोगों की बुराई करना।  बुराई करने से इन्हें जो ऊर्जा मिलती है उसके आगे उनके शैशव का मातृ दुग्धपान तक फीका लगता है। इनके लिए इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे अच्छे लोगों की बुराई कर रहे हैं या बुरे लोगों की। इन्हें तो बस बुराई में ही अनिर्वचनीय आनंद आता है और इस आनंद के लिए वे कुछ भी कर गुजरने को सदैव तैयार रहा करते हैं। जहां रेत का कण तक न हो वहां समन्दर बता देने से लेकर आसमान में सूराख तक कर देने की बातें करने वाले ये लोग हर कहीं पाए जाते हैं। यह जरूरी नहीं कि इनके दर्शन किसी काईन हाउस या धर्मशाला में ही हों। ये लोग कहीं भी हो सकते हैं। कहीं भी आवागमन कर सकते हैं और कहीं भी किसी समय पाए जा सकते हैं। इन लोगों का कोई दिन ऎसा नहीं जाता जब किसी की बुराई के बगैर बीता हो। हर दिन नई बुराई, पुरानी बुराई आदि का मिश्रण साथ लेकर चलते हैं और जहां मौका मिलता है वहां बुराई का पूरे प्रवाह के साथ विरेचन कर देते हैं।

सामने वाला सुनना चाहे, न चाहे, ये तो पूरे वेग से सुनाने लगते हैं। यह भी जरूरी नहीं कि जिसकी बुराई की जा रही है उससे सामने वाला परिचित हो ही। बुराई करने वाले हर कहीं बिना कोई अवसर देखे, जब-तब बुराई करनी शुरू कर दिया करते हैं। बुराई करने वालों की सबसे बड़ी तारीफ ही यह है कि उन्हें बुराई करना भी पसंद है और बुराई सुनना भी। इन दोनों ही स्थितियों में उन्हें अपार रस की अनुभूति होती है। इस रस को पाने के लिए वे किसी भी हद तक जा सकते हैं, किसी भी सीमा तक नीचे गिर सकते हैं। इन लोगों के लिए नीचे गिरना और झुकना ही वे ब्रह्मास्त्र हैं जिनके बूते कहीं भी घुसपैठ कर कहीं भी मुँह लगाकर कुछ भी चाटने और पीने लग जाते हैं। राई को पहाड़ तक बता देने वाली बुराई को सूक्ष्म से विराट तक स्वरूप दे डालने की सामथ्र्य रखने वाले इन बुरे लोगों की भीड़ अपने आस-पास से लेकर उन सभी स्थानों में देखी जा सकती है जिन्हें सार्वजनिक कहा जाता है। फिर इन सभी स्थानों पर एक से दूसरा बुरा मिलता है तब लगता है जैसे बुरों-बुरों का स्नेह झर आया हो। एकाधिक बुरे होने की स्थिति में तो इनकी संख्या इस तेजी से बढ़ने लगती है कि लगता है रोजाना बुरे लोगों का कोई भण्डारा ही हो। उन स्थानों का तो भगवान ही मालिक है जहां एक-दो बुरे लोगों का जमावड़ा ही हो। 

इन बुरे लोगों का पारस्परिक वाचन और श्रवण समीकरण भी इतना तगड़ा होता है कि एक बुराई करता है तो दूसरा चाव लेकर सुनता है। और जब दूसरा बुराई की धाराएं बहाता है तब पहला वाला दत्तचित्त होकर बुराइयों में नहाता हुआ आनंद पाता है। बुरे लोगों की यही खासियत होती है कि इन्हें बुराई करने में ही जीवन का सर्वोपरि आनंद आता है और इस आनंद के आगे उनके जीवन के दूसरे सारे आनंद और काम फीके लगते हैं। यही कारण है कि बुराई सुनने और करने वालों का गठजोड़ फेविकोल तक को शर्माने लगता है। इन बुरे लोगों को अच्छे लोग कभी नहीं सुहाते। लोग भले ही एक को दोष दें मगर दोनों ही समान रूप से दोषी होते हैं। सुनाने और सुनने वाले दोनों के मन इतने मलीन और घृणित हुआ करते हैं कि इनकी वाणी से जो उच्चारित होगा वह बुराई ही होगी। किसी के बारे में अच्छी बात कहने का सौभाग्य भगवान इन्हें कभी नहींं देता। लगातार बुराइयों को सुनते और वाचन करते हुए ये लोग जिन्दगी भर बुराई करने में माहिर हो जाते हैं और अन्ततः बुराइयों में ही रमे रहते हुए एक दिन खाक हो जाते हैं।

इनके पूरे जीवन का दुर्भाग्य ऎसा कि ये चाहते हुए भी बुराई करना और सुनना छोड़ नहीं पाते क्योंकि कभी बुराई छोड़ने का विचार भी करते हैं तब कोई दूसरा बुरा इनके सम्पर्क में आकर इन्हें और ज्यादा बिगाड़ देता है। बुरे लोगों में भी उद्योगों की तरह लघु, मध्यम और उच्च श्रेणियां होती हैं। हमारे भी आस-पास ऎसे खूब बुरों की भरमार है। जरूरत है तो बस थोड़ा उन्हें देखने और सुनने भर की। जो लोग जीवन में कुछ पाना और बनना चाहते हैं उन्हें चाहिए कि ऎसे बुराई करने वाले और सुनने वाले दोनों से दूरी बनाए रखें वरना बुराई का संक्रमण इतना बुरा होता है कि अच्छे-अच्छे लोगों के व्यक्तित्व भी यह ग्रहण लगा सकती है। अपने आस-पास जो बुरे लोग हैं उनके प्रति दया और करुणा भाव रखें और मन ही मन यह भावना करें कि कहीं ये आपके बाड़े के साँप-बिच्छू या हड़काये श्वान अथवा कोई हिंसक पशु होते तो क्या गज़ब हो जाता। बुरे लोगों की संगति से मुक्त रहने की जो लोग कोशिश करते हैं वे ही सकारात्मक चिंतन से भरे-पूरे होकर दुनिया में अपनी सुनहरी छवि का निर्माण कर पाते हैं।


---डॉ. दीपक आचार्य---
9413306077

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