प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उम्मीद जताई है कि ऐसे में जबकि दुनिया आर्थिक मंदी झेल रही है, भारत की अर्थव्यवस्था अपने लचीलेपन के चलते इससे आसानी से पार पा लेगी. उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद और समुद्री डकैती सहित कई नए आयाम सामने ला दिए हैं.
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत जिस पेचीदा रणनीतिक वातावरण का सामना कर रहा है, उसमें वरिष्ठ विदेश नीति प्रबंधकों के लिए जरूरी है कि वे जमीनी स्तर पर नीतियों की प्रभावशीलता का आकलन करते रहा करें.
उन्होंने कहा कि हमारी विदेश नीति के जरूरी आयाम नहीं बदले हैं. देश की सुरक्षा का बाहरी खतरे से बचाव करना और आर्थिक खुशहाली तथा वैश्विक हिस्सेदारी को बढ़ावा देना हमारी विदेश नीति का केंद्र बिंदु बने रहेंगे. लेकिन एक गतिशील वातावरण मांग करता है कि हम अपनी नीतियों के उपकरणों को हमेशा चुस्त-दुरूस्त बनाए रखें. सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने कहा कि हमारे पड़ोसी राष्ट्रीय हितों के संदर्भ में सबसे महत्वपूर्ण हैं और इसी को देखते हुए पिछले साल हमने अपने पड़ोसी देशों के साथ संवाद की कई पहल की है.
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