खंडवा जिले में चल रहा जल सत्याग्रह खत्म. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 11 सितंबर 2012

खंडवा जिले में चल रहा जल सत्याग्रह खत्म.


मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में 17 दिनों से चल रहा जल सत्याग्रह आखिरकार खत्म हो गया. खंडवा जिले के ग्राम घोघलगांव में पिछले 17 दिनों से ओंकारेर बांध में बढ़ते जलस्तर के विरोध में चल रहा जल सत्याग्रह आंदोलन सोमवार को सरकार द्वारा 189 मीटर पर जल स्तर नियंत्रित रखने के आदेश के बाद समाप्त हो गया. 

नर्मदा बचाओ आंदोलन से जुड़ी कार्यकर्ता चित्तरुपा पालित ने कहा कि यह जल सत्याग्रह अब भूमि अधिकार सत्याग्रह का स्थान लेगा और बांध प्रभावितों को उनकी डूब में आयी जमीन के बदले जमीन दिलाने और पुनर्वास के हक दिलाने के लिए तटस्थ होकर कार्य करेगा. उल्लेखनीय है कि 520 मेगावाट क्षमता की ओंकारेर जल विद्युत परियोजना से 31 गांव प्रभावित हुए है, लेकिन शेष रहे 9 गांवों के लोग अपनी मांगों को लेकर 25 अगस्त से बांध में 189 मीटर से अधिक जलभराव के विरोध में सत्याग्रह कर रहे थे. 

प्रदेश सरकार ने बांध में चार मीटर अधिक जलभराव के साथ बांध का स्तर 190.5 मीटर तक बढ़ा दिया था. इस बढ़े हुए जलस्तर के कारण सत्याग्रही इसी पानी में बैठकर जान की परवाह किए बिना सत्याग्रह कर रहे थे. समूचे मामले को लेकर तीन दौर की वार्ताएं विफल होने पर मामला मुख्यमंत्री के पाले में था और आज सरकार ने बांध प्रभावितों के हित में निर्णय लिया, जिससे सत्याग्रह स्थल पर गर्माता माहौल काफी हद तक शांत हो गया है. 

एनएचपीसी के डायरेक्टर डीबी भार्गव सहित दो सदस्यों का दल आज क्षेत्रीय सांसद अरुण यादव के साथ घोघलगांव पहुंचा, जहां उसने बांध प्रभावितों की समस्याएं सुनी और स्थिति का आंकलन किया. केन्द्रीय दल ग्राम धराजी (देवास) भी पहुंचा और वहां अनशनरत आंदोलनकारियों से भेंट की. दल अपनी रिपोर्ट केन्द्रीय उर्जा मंत्री विरप्पा मोइली को देगा. इस अवसर पर सांसद यादव ने कहा कि एक सप्ताह पूर्व जो निर्णय प्रदेश सरकार द्वारा ले लिया जाना था. वह अब व्यापक स्तर पर दबाव के बीच लिया गया है. उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार विस्थापितों पर कोई एहसान नहीं कर रही है बल्कि यह तो उनका हक और अधिकार है. 

यादव ने कहा कि वे किसानों और ग्रामीणों के साथ है और बांध प्रभावितों को उनके घर, मकान और जमीन दिलाने में अग्रणी भूमिका निभाएंगे. उन्होंने कहा कि एनएचपीसी से जो भी वंछित सहयोग जरुरी होगा वह भी केन्द्र सरकार देगी. उल्लेखनीय है कि नर्मदा घाटी के जिले में दो बांध इंदिरासागर और ओंकारेर है. जहां दोनों बांधों का जलस्तर सरकार ने क्रमश: दो मीटर और चार मीटर बढ़ाने की तैयारी की थी. ओंकारेर बांध का जलस्तर वापस 189 मीटर पर रखे जाने का निर्णय तो प्रदेश सरकार ने कर दिया है, लेकिन इंदिरासागर बांध को लेकर कोई फैसला नहीं किया है. इस बांध का जलस्तर बढ़ने को लेकर बड़खलिया (खंडवा) तथा खरदाना (हरदा) में जलसत्याग्रह जारी है. खरदाना और बडखलिया में जलसत्याग्रह आज तेरहवें दिन भी जारी रहा.

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