FDI विमानन कंपनियों को राहत देगी. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 15 सितंबर 2012

FDI विमानन कंपनियों को राहत देगी.


एविएशन सेक्टर में एफडीआई की मंजूरी के बाद नकदी और घाटे से जूझ रही भारतीय विमानन कंपनियों की उड़ान और ऊंची हो सकती है। किंगफिशर जैसी बेदम हो रही कंपनियों को जल्द से जल्द राहत मिलने की भी संभावनाएं हैं। इसके अलावा प्रतिस्पर्धा बढ़ने से पैसेंजरों को भी फायदा मिल सकता है। हालांकि, इसके लिए अगले तीन से पांच साल तक इंतजार करना होगा। विदेशी एयरलाइंस के आने के बाद इस सेक्टर को तकनीक और मार्केटिंग का भी फायदा मिल सकता है। 

अभी तक एविएशन सेक्टर में विदेशी निवेश तो हो सकता था लेकिन विदेशी एयरलाइंस, भारतीय एयरलाइंस में निवेश नहीं कर सकती थीं। सरकार के शुक्रवार के फैसले के बाद विदेशी विमानन कंपनियां भी भारतीय विमानन कंपनियों में 49 फीसदी तक निवेश कर सकेंगी। इस सेक्टर के जानकारों का कहना है कि इस फैसले से काफी फायदा होगा लेकिन इसके लिए कुछ वक्त तक इंतजार करना होगा। इसके अलावा जानकारों ने सरकार को आगाह किया है कि वह विदेशी एयरलाइंस के निवेश पर कड़ी निगरानी रखे ताकि भविष्य में सुरक्षा को किसी तरह का खतरा नहीं हो।

इक्का-दुक्का एयरलाइंस को छोड़ ज्यादातर कंपनियां इस वक्त घाटे में हैं। इनमें सबसे ज्यादा खराब हालत किंगफिशर की है। जब यह एयरलाइंस बुरी तरह कर्ज में डूब गई थी तो सरकार ने उसी वक्त इस सेक्टर में एफडीआई लाने का मन बनाया था। लेकिन किन्हीं वजहों से यह मामला टलता रहा। अब इसके फाइनल होने के बाद माना जा रहा है कि अगले तीन से पांच साल के भीतर भारतीय एयरलाइनों का चेहरा बदल सकता है।

कई जानकारों का मानना है कि देर से ही सही लेकिन सरकार ने सही फैसला लिया है। ऐसे ही एक जानकार जितेंद्र भार्गव का कहना है कि अगर यही फैसला पहले लिया गया होता तो शायद किंगफिशर इस हाल में नहीं पहुंचता। अब चूंकि 49 फीसदी की सीमा है ऐसे में यह देखना होगा कि क्या कोई एयरलाइंस 49 फीसदी का निवेश करके भी किंगफिशर को दोबारा खड़ा कर पाती है या नहीं। उन्होंने कहा कि इसका एक बड़ा फायदा यह होगा कि अब तक विदेशी एयरलाइंस, भारतीय एयरलाइंस को जो तकनीक और मैनेजमेंट की तरकीबें उपलब्ध नहीं करा रही थीं वह हिस्सेदार बनकर यह सब जानकारियां दे सकेंगी। इससे भारतीय एयरलाइंस के मैनेजमेंट के कामकाज में पारदर्शिता आएगी। 

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