प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने केंद्रीय जांच ब्यूरो के नए निदेशक रंजीत सिन्हा की नियुक्ति पर रोक लगाने से मना कर दिया. उन्होंने भाजपा की मांग को स्वीकार करने से इंकार कर दिया और इस आरोप को ‘अवांछित’ करार देते हुए कहा कि यह नियुक्ति प्रवर समिति की सिफारिश से गयी प्रक्रिया को रोकने के लिए की गयी है.
भाजपा नेता अरुण जेटली को लिखे एक पत्र में प्रधानमंत्री ने कहा है कि लोकपाल लागू होने तक प्रमुख जांच एजेंसी को बिना प्रमुख के नहीं रखा जा सकता और ‘इसलिए नयी नियुक्ति को अधर में रखने का सवाल ही नहीं है.’
जेटली तथा लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा था कि सीबीआई के नए निदेशक की नियुक्ति नहीं की जानी चाहिए थी क्योंकि राज्यसभा की प्रवर समिति ने सिफारिश की थी कि इस प्रकार की नियुक्तियां एक कोलेजियम के जरिए होनी चाहिए. प्रधानमंत्री ने कहा कि यह कहना कि नियुक्ति प्रवर समिति द्वारा सिफारिश की गयी प्रक्रिया को रोकने के लिए की गयी है, पूरी तरह अवांछित है और इसमें कोई दम नहीं है. उन्होंने कहा कि वह इस बात का भी खंडन करते हैं कि पूर्व में इस पद पर यूपीए सरकार द्वारा की गयी नियुक्तियां हितों से प्रेरित थीं. सिंह ने कहा कि लोकपाल और लोकायुक्त विधेयक को अभी राज्यसभा में पारित किया जाना है और इसे प्रवर समिति को सौंपा गया था जिसने अपनी रिपोर्ट राज्यसभा में पेश की है.
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘प्रवर समिति ने कई बदलावों का सुझाव दिया है जिन पर आधारित संशोधन पेश करने के लिए सरकार को विचार विमर्श करने की जरूरत है. राज्यसभा के संशोधित विधेयक को पारित किए जाने के बाद इसे आगे विचार विमर्श के लिए लोकसभा को लौटाया जाएगा.’ उन्होंने कहा कि सरकार भी नए कानून को लागू करने के लिए सभी प्रयास कर रही है लेकिन सीबीआई में शीर्ष पद को खाली नहीं रखा जा सकता.
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘ऐसी परिस्थितियों में सरकार ने, जनहित में, सीवीसी अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार नियुक्ति की है.’ 1974 बैच के बिहार कैडर के अधिकारी सिन्हा को नया सीबीआई प्रमुख नियुक्त किया गया है. इस समय वह भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के महानिदेशक हैं.

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