10 बड़ी मुस्लिम संस्थाओं की जॉइंट कमिटी ने मोदी को सशर्त समर्थन देने की पेशकश की है। जॉइंट कमिटी ने कहा है कि यदि गुजरात के मुख्यमंत्री 2002 के दंगों को लेकर खेद जता देते हैं या माफी मांग लेते हैं तो वह गुजरात के नवनिर्माण में मुस्लिम वोटरों से उन्हें समर्थन देने के लिए अपील कर सकती है।
10 मु्स्लिम संस्थाओं को मिलाकर जॉइंट कमिटी ऑफ मुस्लिम ऑर्गनाइजेशन फॉर इंपॉवरमेंट (JCMOE) का निर्माण किया गया है। इसमें जमीयत-उल-उलेमा हिन्द, जमात-ए-इस्लामी हिन्द, ऑल इंडिया मजलिस-ए-मुशावरत, ऑल इंडिया मिली काउंसिल, मुवमेंट फॉर इंपॉवरमेंट ऑफ मुस्लिम इंडियंस, ऑल इंडिया मोमिन कॉन्फ्रेंस, ऑल इंडिया शिया कॉन्फ्रेंस, मरकाजी जमीयत-अहले हदिथ, इमारत-ए-शरिया और ऑल इंडिया मुस्लिम एजुकेशन सोसायटी शामिल हैं।
जॉइंट कमिटी के चेयरमैन शैयद शहाबु्द्दीन ने कहा, ' मुसलमानों के लेकर मोदी के नजरिए में बदलाव आ रहा है। मोदी और बीजेपी गुजरात विधानसभा चुनाव में मुसलमानों को खास तवज्जो दे रही है। लेकिन देश और प्रदेश का मुस्लिम समुदाय 2002 का दंगा भूला नहीं है।' उन्होंने कहा कि धर्मनिरपेक्षता का दावा करने के बजाय मोदी 20 ऐसी सीटों से मुस्लिम उम्मीदवार उतारे जहां मुसलमान वोटरों की संख्या 20% है।
उन्होंने कहा कि गुजरात के मुस्लिमों ने पिछले 10 सालों में कम संसाधन में खुद को फिर से संभाला है। यहां के मुस्लिमों ने महसूस किया कि उन्हें कहीं जाने की जरूरत नहीं है बल्कि वह गुजरात में ही रहेंगे और उन्हें उम्मीद है कि विकास में समान हिस्सेदारी मिलेगी। शहाबुद्दीन ने 1984 के दंगे की तर्ज पर 2002 के दंगा पीड़ित मुस्लिमों के लिए मुआवजे की मांग की।
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