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| हृषिकेश सुलभ |
हृषिकेश सुलभ जाने-माने कथाकार हैं। सुप्रिसद्ध इंदू शर्मा इंटरनेशनल कथा सम्मान भी मिला है। अभी ऑल इंडिया रेडियो में काम कर रहे हैं। लेकिन यह खबर इनकी एक दूसरी तस्वीर सामने ला रही है। खबर है कि पटना में गुरुवार की शाम एक नाटक की फोटो ले रहे प
त्रकार के साथ इन्होंने बदसलूकी की है। कालीदास रंगालय में सुलभ ने एक अखबार के फोटोग्राफर का कॉलर पकड़कर धक्का-मुक्की की। इतना ही नहीं उन्हें संपादक को जाकर बोल देने की धमकी भी दे डाली।
पटना के वरीय पत्रकारों ने घटना की निंदा की है। हालांकि अखबारों में हृषिकेश सुलभ के नाम के साथ उनकी बदतमीजी को खबर प्रकाशित नहीं की गई। पूरे वाकये को जानने के बाद हमारे कलीग और तेजतर्रार पत्रकार सरोज कुमार ने फेसबुक पर जब लिखा तो सुलभ ने अपनी इस घटिया हरकत पर सीधे कुछ नहीं बोलते हुए हिन्दुस्तान के पत्रकार सरोज की आईडेंटिटी पर ही सवाल उठा दिया। उसे वहां उपस्थित नहीं होने पर नहीं लिखने की सलाह दे डाली। यह भी कहा कि अगर घटना सही थी तो आपके अखबार में क्यों नहीं आई? किसी वरिष्ठ पत्रकार ने क्यों नहीं बोला?
फिर फेसबुक के दूसरे साथियों से सच बताने के लिए कहा।
इसके बाद भी उनसे उनका पक्ष बताने के लिए आग्रह किया गया तो उन्होंने अपनी हरकत को सही साबित करने की महज पूरी कोशिश की। उन्होंने जवाब दिया, 'उस फोटोग्राफर के हॉल से बाहर जाने के बाद दर्शकों ने तालियां बजाकर घटना का स्वागत किया।' हृषिकेश सुलभ की ओर से विस्तृत तर्क देने के बाद भी फोटोग्राफर पर महज इतना आरोप दिख रहा है कि उसने फोटो खींचने के लिए दृश्य और दर्शकों के बीच में थोड़ी खलल डाली। इससे हृषिकेश सुलभ जी के रसास्वादन में शायद कुछ अधिक ही विघ्न पड़ गई।
जबकि होना तो कायदे से यह चाहिए था कि उन्हें उस पत्रकार से माफी मांगनी चाहिए।
साभार : अंतरजाल

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